सीबीआई की एक विशेष अदालत ने तेरह साल पहले पुलिस हिरासत में प्रताड़ना के कारण 26 वर्षीय एक युवक की हुई मौत के मामले में दो पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है। यह मामला 2005 का है।इनके अलावा मामले में तीन और आरोपितों- तत्कालीन असिस्टेंट पुलिस आयुक्त टीके हरिदास, सर्किल इंस्पेक्टर ईके साबू तथा सब-इंस्पेक्टर अजीत कुमार को भी सबूत नष्ट करने और साजिश के लिए तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई गई है। इन पर भी 5-5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

एक आरोपित केवी सोमन की केस लंबित रहने के दौरान मौत हो गई जबकि एक अन्य आरोपित वीपी मोहनन को पहले ही बरी किया जा चुका है। विशेष सीबीआई जज जे. नजीर ने इस मामले में आरोपित असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर के. जीतकुमार तथा सिविल पुलिस ऑफिसर एसवी श्रीकुमार (क्रमशः आरोपित नंबर एक और दो) को फांसी की सजा के साथ दोनों पर 2-2 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

जज ने फैसला सुनाते हुए कहा- “आरोपित नंबर एक और दो ने बर्बर और कायराना हत्या की है। इनकी इन करतूतों का पुलिस विभाग पर निश्चित ही विपरीत प्रभाव पड़ेगा।”केरल पुलिस सूत्रों के अनुसार, राज्य में संभवतः यह पहला मामला है कि सेवारत पुलिस कर्मियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।

कोर्ट ने कहा कि पुलिस कर्मी नागरिकों के जान-माल की रक्षा के दायित्व से बंधे हैं और यदि वे अपराध करने लगें तो नागरिकों की सुरक्षा तो खतरे में पड़ जाएगी। जज ने कहा- “यदि संस्थान से लोगों का विश्वास उठ गया तो कानून-व्यवस्था पर उसका असर पड़ेगा, जो समाज के लिए खतरनाक स्थिति होगी।”

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चोरी के केस में हिरासत में लिया था

अभियोजन के मुताबिक, उदयकुमार नामक युवक को चोरी के एक केस के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था। बाद में उसे छोड़ दिया गया। लेकिन जब उसने अपनी जेब से निकाले गए चार हजार रुपए पुलिस वालों से मांगे तो वे नाराज हो गए और लोहे की रॉड से उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी। जिससे उसकी मौत हो गई। विरोध प्रदर्शन हुए इस मामले में उदयकुमार को हिरासत में लेने वाले पुलिसकर्मी जीतकुमार तथा श्रीकुमार को हत्या का जिम्मेदार ठहराया गया है जबकि तीन अन्य को साजिश करने और सबूत मिटाने का दोषी पाया गया।

इस घटना के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। बाद में उदयकुमार की मां प्रभावती की अर्जी पर हाई कोर्ट के आदेश से सीबीआई ने जांच अपने हाथ में लिया था।

मां बोली- बेटे को न्याय मिला

फैसले के बाद उदयकुमार की 67 वर्षीय मां प्रभावती ने कहा- “आखिरकार, मेरे बेटे को न्याय मिला। जो मैंने झेला है, वह किसी और मां के साथ नहीं हो। यह सभी के लिए एक सीख होगी।”

इस बीच, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने यहां एक सेमिनार में कहा कि पुलिस को अपने अधिकार का इस्तेमाल लोगों और राज्य के लिए न्यायोचित तरीके से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रताड़ना मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। पुलिस को मानवाधिकारों का रक्षक होना चाहिए।