किसानाें का दर्द जानने एक विदेशी जा रहा गांव-गांव पैदल

- in पंजाब

चंडीगढ़। पंजाब में किसानों द्वारा आत्महत्याओं का दौर जारी है। इस पर राजन‍ीति तो खूब हो रही है, लेकिन शायद ही किसी ने किसानों की असली पड़ा और इसके कारणों को जानने की को‍शिश की। नेता राजनीति तो करते रहे, किसानों के बीच जाने की जहमत की। अब एक विदेशी नागरिक ने राह दिखाई है। ब्रिटेन के यूके डेविड पैदल यात्रा कर देशभर में किसानाें के बीच जा कर उनके संकट और इसके कारणों को जानने की काेशिश कर रहे हैं। वह कन्‍याकुमारी से लेकर अमृतसर तक की पदयात्रा कर रहे हैं। वह पंजाब पहुंच गए हैं और किसानों के बीच जाकर उनसे रूबरू हो रहे हैं।

किसानाें का दर्द जानने एक विदेशी जा रहा गांव-गांव पैदलवह किसानों को खुदकुशी रोकने के लिए उन्‍हें प्रेर‍ित करने के संग इसके उपायों पर समाज के विभिन्न वर्गों को संदेश पहुंचा रहे हैं। यूके डेविड जुलाई 2017 से देशभर में पैदल यात्रा करते हुए पंजाब पहुंचे हैं। उनका अंतिम पड़ाव श्री दरबार साहिब अमृतसर है। वहां वह मार्च के अंत में पंहुचेंगे।

वर्ष 2017 में कन्याकुमारी से अमृतसर तक पैदल यात्रा करने वाले डेविड संगरूर के महोली कलां में आर्गेनिक खेती करने वाले किसानों से मिले। वह पंजाब के संगरूर जिले के महोली कलां गांव में गुरबीर सिंह और फतेहगढ़ साहिब के फार्मर फॉर सेफ फूड नाम से आर्गेनिक खेती कर रहे किसानों से भी मिले। उन्होंने किसानी के मसलों को लेकर प्रसिद्ध एग्रो इकॉनमी के विशेषज्ञ दविंदर शर्मा से उनके आवास पर मुलाकात की।

 

जागरण से बातचीत में उन्‍हाेंने अपनी पैदल यात्रा के बारे में बताया। डेविड ने बताया कि खेती को लेकर किसानों में आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है और उनके लिए घाटे का सौदा बन रहा है। उनकी आत्महत्याओं का न रुक पाना बेहद संवेदनशील विषय है। यही नहीं, रासायनिक खेती के कारण पानी और पर्यावरण भी जहरीले हो गए हैं। किसानों को इससे निकालने की जरूरत है।

उन्‍होंने बताया कि इसी विषय को लेकर उन्होंने जुलाई 2017 में कन्याकुमारी से पैदल यात्रा शुरू की और वह हर रोज लगभग 35 से 40 किलोमीटर चल रहे हैं। इसमें उनके साथ नाभा के बहादुर सिंह भी साथ दे रहे हैं। वह कहते है, क्या इससे बड़ा मुद्दा इस समय कोई और है?

डेविड की यात्रा की खास बात है। वह बेहद साधारण लिबास में यात्रा कर रहे हैं। उन्हें अलग तरह की खेती करने वाले किसान मिलते हैं तो वह उनके साथ हो लेते हैं और कुछ समय उनके साथ रहने के बाद आगे जाते हैं। 28 साल के अविवाहित डेविड जहां किसानों से आत्महत्या न करने के लिए प्रेरित करते हैं तो समाज के अन्य वर्गों से किसानों की सहायता के लिए आगे आने को कह रहे हैं।

डेविड किसानों के फार्मों पर रहते हैं या फिर मंदिर और गुरुद्वारों में। वह बताते हैं कि गुरुद्वारों के प्रबंधकों ने उनको बेहद आदर सत्कार दिया है। पंजाबी लोग काफी खुश मिजाज हैं और बेहद अपनत्व जताते हैं। डेविड अपनी यात्रा के संस्मरणों को एक किताब में भी पिरोएंगे और नीति शास्त्रियों के सामने किसानों को आ रही दिक्कतों और उनसे निपटने के संभावी उपायों के सुझाव भी देंगे।

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