आक्रामक हुए हुड्डा ने विकास पर मनोहर से पूछे पांच सवाल

चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा आजकल आक्रामक अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह राज्‍य की भाजपा सरकार और मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल पर हमला करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। उन्‍होंने अब भाजपा सरकार के अब तक के कार्यकाल का हिसाब मांगते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल से पांच सवाल पूछे हैैं। हुड्डा सत्‍ता में आने पर लोगों को विभिन्न राहत देने का ऐलान भी कर रहे हैं।आक्रामक हुए हुड्डा ने विकास पर मनोहर से पूछे पांच सवाल

हुड्डा ने यहां मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल पर यहां जमकर हमले किए। हुड्डा ने उन पर संवैधानिक संस्थाओं में दखल देने के आरोप भी लगाए। हुड्डा ने सत्ता में आने पर किसानों के कर्ज माफ करने, शहरी सेक्टरों में एन्हांसमेंट की राशि का ब्याज खत्म करने तथा तीन हजार रुपये मासिक पेंशन करने के बाद 80 साल से अधिक उम्र के लोगों की पेंशन में वार्षिक बढ़ोतरी करने के बड़े एेलान किए।

चंडीगढ़ में पार्टी के प्रमुख नेताओं से चर्चा के बाद हुड्डा ने जनक्रांति रथयात्रा के तीसरे चरण का एलान किया। हुड्डा 30 जून को पुन्हाना, 1 जुलाई को फिरोजपुर झिरका और 2 जुलाई को नूंह में जनक्रांति रथयात्रा निकालेंगे। जुलाई के पहले पखवाड़े में फतेहाबाद और दूसरे में यमुनानगर में उनका रथ दौड़ेगा। अगस्त के पहले पखवाड़े में उनका रथ महेंद्रगढ़ पहुंचेगा।

भाजपा नेताओं के विशेष व्यक्तियों से संपर्क अभियान पर सवाल उठाते हुए हुड्डा ने कहा कि यह सब दिखावा है। साढ़े तीन साल में एक भी नई परियोजना भाजपा सरकार नहीं ला पाई। साढ़े चार हजार घोषणाएं भी ऐसी हैैं, जिनका कोई आधार नहीं है। तहसीलदार व पटवारी बदलने की घोषणाओं को भी उपलब्धियां माना जा रहा है।

हुड्डा ने अभय चौटाला और चंद्रमोहन बिश्नोई की मुलाकात को सामान्य करार दिया। हुड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री उनके पास अपनी उपलब्धियों का पिटारा लेकर आएं। यदि उनके द्वारा बताई गई उपलब्धियों से मैैं संतुष्ट हो गया तो सरकार की तारीफ करूंगा। भाजपा अपने भाषण को ही शासन समझ बैठी है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हालत यह है कि मुख्यमंत्री अपने विधानसभा क्षेत्र करनाल में एयरपोर्ट के लिए आज तक एक इंच जमीन तक की व्यवस्था नहीं कर पाए। इससे बाकी प्रदेश के विकास का पता चलता है। उन्होंने कहा कि हमने कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया था, लेकिन भाजपा हाई कोर्ट में उनकी मजबूत पैरवी नहीं कर पाई। विधानसभा में विधेयक लाकर कर्मचारियों के हितों की पैरवी की जानी चाहिए।

हुड्डा ने मनोहरलाल से ये सवाल पूछे –

1. प्रदेश पर एक लाख 60 हजार करोड़ का कर्ज हो गया। साढ़े तीन साल में न आइएमटी आई, न रेलवे लाइन बिछी, न बिजली प्लांट लगा और न जमीन अधिगृहीत हुई। फिर यह राशि कहां खर्च हुई?

2. किसानों को सरसों की खरीद के टोकन दिए गए। फिर भी फसल नहीं खरीदी जा रही। सरकार ने किसानों को टोकन देकर मूर्ख क्यों बनाया?

3. गन्ना किसानों का 747 करोड़ रुपया बकाया है। डीजल व पेट्रोल पर वैट की वजह से उन पर अधिक दामों की मार पड़ रही। भाजपा किसानों का बकाया भुगतान क्यों नहीं कर रही और डीजल व पेट्रोल पर वैट खत्म कर उसे जीएसटी के दायरे में क्यों नहीं ला रही?

4. हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग और हरियाणा लोक सेवा आयोग में मुख्यमंत्री मनोहर लाल क्यों दखल देते हैैं? क्यों सरकार ने सरकारी नौकरियों को परचून के सामान की तरह बेच दिया? यदि हमारे समय के चेयरमैन डीपी वत्स ने ठीक काम नहीं किया था तो सरकार ने उन्हें क्यों राज्यसभा सदस्य बनाया?

5. भाखड़ा ब्याज मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) का चेयरमैन इसके भागीदार चार राज्यों हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व राजस्थान से बाहर का होना चाहिए था। भाजपा ने इसका क्यों विरोध नहीं किया और इन शर्तों को क्यों स्वीकार किया, जिनकी वजह से हरियाणा का मेंबर इरीगेशन अब कभी नहीं बन पाएगा?

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