समय बताने का है इस घड़ी का अनोखा अंदाज

- in ज़रा-हटके

दुनिया में कई ऐसे लोग है जो घड़ी पहनते है ऐसे में घड़ी तो हम सभी के यहाँ दीवारों पर लटकाई जाती है ताकि सही समय पर सही काम हो जाए. वक्त देखकर ही हमारा दिन कटता है, ऐसे में कभी सोचा है कि अगर घड़ी कि सुइयां उलटी चलने लगे तो क्या हो..? नहीं ना, लेकिन ऐसा होता है. जी दरअसल में आज हम जिस जगह के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वहां पर एक घड़ी है जो उलटी दिशा में चलती है यानी दाईं से बाईं ओर.

समय बताने का है इस घड़ी का अनोखा अंदाज

ऐसा क्यों होता है वह भी हम आपको बता दें, जी दरअसल में जिस घड़ी की हम बात कर रहे है वह कई सालों पुरानी है और जब वह मिली थी तब से ही वह उलटी दिशा में चल रही है. यहाँ पर शुरू से ही लोग एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में चलने वाली घड़ियों का प्रयोग करते नजर आ रहे हैं. जहाँ ये सब होता है उस जगह का नाम छत्तीसगढ़ राज्य का कोरबा है.

यहाँ पर आदिवासी शक्ति पीठ से जुड़े एक स्थान पर गोंड आदिवासी परिवारों में ऐसी घड़ियों का इस्तेमाल होता है जो एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में चलती है और शुरू से ही यहाँ ऐसी ही घड़ियां चल रही हैं. यहाँ पर घड़ी को लेकर गोंड आदिवासी परिवारों का कहना है कि घड़ी प्रकृति के नियम के अनुसार चलती है और उसका ऐसे ही चलना स्वाभाविक है.

गोंड आदिवासी परिवार वालों का यह कहना है कि उनका टाइम गोंडवाना टाइम होता है और उनकी घड़ी हमेशा से ही दाईं से बाईं ओर घूमती है जैसे पृथ्वी दाईं से बाईं ओर घूमती है. यहाँ के लोगों का कहना है कि सूर्य, चंद्रमा और तारे भी दाईं से बाईं ओर घूमते है, नदी-तालाब में पड़ने वाले भंवर भी दाईं से बाईं ओर घूमते है और पेड़ के तने से लिपटी बेल भी दाईं से बाईं ओर लिपटती है इस वजह से उनकी घड़ी भी ऐसी चलती हैं.

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