सोना 20 रुपये फिसला, चांदी में 100 रुपये बढ़ा, डॉलर 65-66 का स्तर रुपये के लिए उचित

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स्थानीय आभूषण निर्माताओं द्वारा सोने की मांग में आई कमी व विदेशों में भी मंद रुझान के कारण सोने का भाव 20 रुपये गिरकर 31,980 रुपये प्रति दस ग्राम हो गया। हालांकि चांदी का दाम औद्योगिक इकाइयों से आई छुटपुट मांग के कारण 100 रुपये बढ़कर 40,300 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।

सोना 20 रुपये फिसला, चांदी में 100 रुपये बढ़ा, डॉलर 65-66 का स्तर रुपये के लिए उचितसिंगापुर में सोना 0.12 फीसदी गिरावट के साथ 1,310 डॉलर प्रति औंस व चांदी 0.15 फीसदी लुढ़क कर 16.37 डॉलर प्रति औंस हो गया। देश की राजधानी में 99.9 व 99.5 फीसदी शुद्धता वाले प्रत्येक सोने के दाम 20 रुपये धीमे होकर क्रमश: 31,980 रुपये व 31,830 रुपये पहुंच गया।

सोने की गिन्नियों के भाव बिना किसी बदलाव के 24,700 रुपये पर स्थिर रहे। वही चांदी के प्रति 100 सिक्कों के दाम भी बिना किसी बदलाव के 74,000 रुपये लिवाल व 75,000 रुपये बिकवाल पर टिके रहे।

35,000 के स्तर से नीचे उतरा सेंसेक्स
ऑटो, हेल्थकेयर, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में तगड़ी बिकवाली के साथ वैश्विक स्तर पर मंदी की खबर से मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 188 अंक गिरकर 35,000 के स्तर से नीचे 34,915.38 पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई का निफ्टी 61.40 अंक यानी करीब 0.57 फीसदी गिरकर 10,618.25 पर बंद हुआ। बाजार में विदेशी संस्थानों की बिकवाली भी जारी रही। सुबह कारोबार की शुरूआत तेजी के साथ हुई थी और सेंसेक्स 35,144.96 पर खुल कर 35,206.55 तक गया लेकिन बिकवाली तलने से यह कारोबार के अंत में 187.76 अंक गिरकर 34,915.38 पर बंद हुआ।

साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में 54.32 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी में सप्ताह भर में 74.05 अंकों की गिरावट रही। बृहस्पतिवार के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने कुल 148.42 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। तदर्थ आंकड़ों के अनुसार घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 578.92 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की।

रुपये में उतार-चढ़ाव चिंता की बात नहीं : एडीबी
भारत का विदेशी पूंजी भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) अभी मजबूत स्तर पर है और इसे देखते हुए रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव को लेकर भारत को अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। अर्थव्यवस्था के लिहाज से हालांकि रुपये में कमजोरी आने से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। यह बात एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयुकी सवाडा ने शुक्रवार को कही। उन्होंने कहा कि एडीबी को तेल मूल्य में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका नहीं है। तेल ने हाल में 75 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छू लिया है।

उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि फॉरेक्स भंडार कुछ समय से बढ़ता जा रहा है। इसमें गिरावट के संकेत नहीं दिख रहे। इसलिए मेरे खयाल से मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव पर अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं। अलग बात है कि मुद्रा में कमजोरी के अच्छे और बुरे दोनों प्रभाव होते हैं।

अच्छा यह होता है कि रुपये के कमजोर होने से निर्यात को फायदा पहुंचता है। बुरा यह है कि कमजोरी से अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ता है। रुपया बृहस्पतिवार को डॉलर के मुकाबले 66.65 पर बंद हुआ था।

देश का फॉरेक्स भंडार पिछले दिनों 424.864 अरब डॉलर के सर्वकालिक ऊपरी स्तर पर पहुंच गया था। उन्होंने कहा कि यदि तेल मूल्य में तेजी से वृद्धि होती है, तो आयातक प्रभावित होंगे। लेकिन इस क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा तेजी से अपनाई जा रही है और तेल मूल्य तेजी से बढ़ने की आशंका भी वास्तविकता पर आधारित नहीं है।

एडीबी ने गत माह जारी एशियाई विकास परिदृश्य में अनुमान दिया था कि 2018 में कच्चा तेल करीब 65 डॉलर प्रति बैरल पर और 2019 में यह करीब 62 डॉलर प्रति बैरल पर रह सकता है।

 

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