भारत की अर्थव्यवस्था साल 2018-19 में और तेजी से आगे बढ़ेगी: आरबीआई गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2017-18 में मजबूत प्रदर्शन किया और चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि और तेज होने की उम्मीद है. पटेल ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक और वित्त समिति की बैठक में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विनिर्माण क्षेत्र में तेजी, बिक्री में वृद्धि, सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन और कृषि फसल के रिकॉर्ड स्तर पर रहने से बल मिला.

उर्जित पटेल ने आगे कहा कि यद्यपि साल 2017-18 में वास्तविक जीडीपी की वृद्धि एक साल पहले के 7.1 फीसद से कुछ हल्की हो कर 6.6 फीसद पर आ गई. लेकिन निवेश की मांग बढ़ने से दूसरी छमाही में रफ्तार में मजबूती लौट आई. रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2017-18 में मजबूत प्रदर्शन किया. विनिर्माण क्षेत्र में तेजी, बिक्री में वृद्धि, क्षमता उपयोग में बढ़ोत्तरी, सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियां और रिकॉर्ड फसल ने प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

वित्त वर्ष 018-19 में  GDP 7.4 फीसद रहने की उम्मीद

उन्होंने कहा, “कई कारण हैं जो साल 2018-19 वृद्धि दर में तेजी लाने में मददगार होंगे. स्पष्ट संकेत है कि अब निवेश गतिविधियों में सुधार बना रहेगा.” पटेल ने कहा कि वैश्विक मांग में सुधार हुआ है, जिससे निर्यात और नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा और वित्त वर्ष 2018-19 में  जीडीपी वृद्धि बढ़कर 7.4 फीसद रहने की उम्मीद है.

पटेल ने कहा कि नवंबर 2016 से उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति सामान्य तौर पर 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि के लक्ष्य से नीचे ही रही. हालांकि, सब्जियों की कीमतों में अचानक तेजी से दिसंबर में मुद्रास्फीति चढ़कर 5.2 फीसद पर पहुंच गई थी, जो कि गिरकर मार्च 4.3 फीसद पर आ गई है.

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उन्होंने यह भरोसा दिलाते हुए कि सरकार राजकोषीय मोर्चे पर सूझबूझ से चलने को प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि कर राजस्व में तेजी और सब्सिडी के अनुकूल होने से सरकार सकल राजकोषीय घाटे (जीएफडी) को कम करके 2017-18 में जीडीपी के 3.5 फीसद पर ले आई है. इसके लिए सार्वजनिक निवेश जरुरतों और सामाजिक क्षेत्र में व्यय के साथ कोई समझौता नहीं किया गया. साल 2018-19 में सकल राजकोषीय घाटा को जीडीपी के 3.3 फीसद पर लाने का लक्ष्य है.

पटेल ने कहा कि निर्यात के मुकाबले आयात में वृद्धि से चालू खाता घाटा (कैड) 2016-17 में 0.7 फीसद से बढ़कर 2017-18 के पहले नौ महीने में 1.9 फीसद हो गई.

 
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