वीडियोकॉन ने ICICI बैंक से लिया 3250 करोड़ का लोन, बदले में बैंक से की ये ‘स्वीट डील’

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वीडियोकॉन समूह के मुखिया वेणुगोपाल धूत ने 2008 में ICICI बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के साथ मिलकर एक कंपनी (ज्वाइंट वेंचर) बनाई. इसमें चंदा कोचर के दो परिजन भी शामिल थे. इस कंपनी ने 64 करोड़ रुपए लोन लिया और कुछ दिनों बाद कंपनी का मालिकाना हक सिर्फ 9 लाख रुपए में उस ट्रस्ट के हवाले कर दिया गया, जिसके मुखिया दीपक कोचर थे. यह खुलासा अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने किया है. पूरे मामले में ICICI बैंक की सीईओ चंदा कोचर पर लोन के बदले फायदा उठाने का आरोप है. अखबार के मुताबिक ज्वाइंट वेंचर को पूरी तरह दीपक कोचर के हवाले करने के 6 महीने पहले ही वीडियोकॉन समूह ने ICICI बैंक से 3250 करोड़ रुपए का लोन लिया. 2017 में जब वीडियोकॉन पर पूरे लोन का 86 प्रतिशत यानी 2810 करोड़ रुपए बाकी था, बैंक ने इस राशि को नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानी एनपीए घोषित कर दिया. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इस मामले का पता चलने के बाद अब जांच एजेंसी धूत-कोचर और बैंक के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है.

अखबार ने पूछा तो बैंक ने जारी की प्रेस रिलीज

इंडियन एक्सप्रेस ने इस बारे में जब ICICI बैंक से जानकारी मांगी तो बैंक ने बुधवार को एक प्रेस रिलीज जारी कर चंदा कोचर का बचाव किया. प्रेस रिलीज में बैंक ने कहा है, ‘चंदा कोचर पर हमें पूरा भरोसा है. उन पर परिवारवाद या हितों के टकराव जैसे जो आरोप लग रहे हैं, वह गलत है. इस तरह की अफवाह जो फैलाई जा रही है, वह बैंक की साख खराब करने का प्रयास है.’ हालांकि बैंक की इस रिलीज में वेणुगोपाल धूत और दीपक कोचर के बीच हुए लेन-देन के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है. बैंक की रिलीज में यह भी कहा गया है कि उसका लोन देने का सिस्टम मजबूत है. यह इस तरह से बनाया गया है कि कोई एक शख्स किसी कंपनी को कर्ज देने के बारे में फैसला नहीं कर सकता.

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धूत-कोचर के लेन-देन की बैंक ने नहीं दी जानकारी

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अखबार ने धूत और कोचर की कंपनी के बीच हुए इस विवादित वित्तीय लेन-देन या शेयर ट्रांसफर की कोई जानकारी नहीं दी. अलबत्ता वीडियोकॉन समूह को लोन जारी किए जाने को लेकर जवाब दिया. बैंक ने इंडियन एक्सप्रेस को भेजे गए जवाब में कहा है, ‘वर्ष 2012 में वीडियोकॉन समूह को 20 बैंकों के समूह ने कर्ज दिया था, जिसकी अगुवाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कर रहा था. यह राशि लगभग 40 हजार करोड़ रुपए थी, जिसमें ICICI बैंक की हिस्सेदारी मात्र 10 प्रतिशत यानी 3250 करोड़ थी. अन्य बैंकों ने लोन देने के लिए जो शर्त लगाए थे, वही ICICI बैंक के भी थे. वर्तमान में बकाया लोन की राशि 2810 करोड़ है, जबकि वीडियोकॉन समूह पर कुल देनदारी 2849 करोड़ रुपए की है. वीडियोकॉन समूह के खाते को 2017 में एनपीए घोषित कर दिया गया है.’

कैसे सामने आया चंदा कोचर के परिवारवाद का मामला

दरअसल, वर्ष 2016 में 15 मार्च को ICICI बैंक के एक शेयर होल्डर अरविंद गुप्ता ने पीएम को चिट्ठी लिखी थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि ICICI बैंक ने कर्ज में डूबी वीडियोकॉन कंपनी को उसके खराब ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद लोन दिया था. इसी चिट्ठी में दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत के व्यावसायिक संबंधों का भी हवाला दिया गया था. वहीं यह भी कहा गया था कि चंदा कोचर के रिश्तेदार महेश आडवाणी और नीलम आडवाणी संदिग्ध तरीके से धूत द्वारा स्थापित कंपनी न्यूपावर के मालिक बन बैठे. गुप्ता ने अपनी चिट्ठी में कहा था कि ICICI बैंक द्वारा लोन देने के बदले धूत की कंपनी का मालिकाना हक कोचर परिवार को सौंपा गया.

 
 
 

 

 

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