एक ऐसा खतरनाक हथियार जिसके सामने भगवान राम को भी माननी पड़ी थी हार

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वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण के पुत्र मेघनाद ने नागपाश अस्त्र से श्रीराम और लक्ष्मण को बेहोश कर दिया था। बाद में गरुड़जी ने आकर उन्हें इस अस्त्र से मुक्ति दिलाई थी।

नागपाश पन्नग अस्त्र का ही एक रूप था। रामायण और महाभारत में ऐसे अनेक अस्त्रों के बारे में लिखा है, जो महाविनाश कर सकते थे जैसे- ब्रह्मास्त्र, आग्नेयास्त्र आदि। वर्तमान परिस्थिति में देखे तो ये अस्त्र-शस्त्र आज के परमाणु बम से भी ज्यादा शक्तिशाली थे। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित हिंदू संस्कृति अंक में इन अस्त्र-शस्त्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।

 

ब्रह्मास्त्र

यह ब्रह्मदेव का अस्त्र माना जाता है। यह सबसे घातक व मारक अस्त्र था, जो दुश्मन को तबाह करके ही छोड़ता था। इसकी काट केवल दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही संभव थी। आज के दौर के हथियारों से तुलना की जाए तो ब्रह्मास्त्र की ताकत कई परमाणु बमों से भी कहीं ज्यादा थी।

 

पाशुपत अस्त्र

यह भगवान शिव का अस्त्र है। इस बाण में मंत्र से पैदा शक्ति व ऊर्जा एक ही बार में पूरी दुनिया का विनाश कर सकती थी। कुरुक्षेत्र में युद्ध के दौरान यह अस्त्र केवल अर्जुन के पास ही था।

 

नारायणास्त्र

नारायणास्त्र वैष्णव या विष्णु अस्त्र के नाम से भी जाना जाता है। यह पाशुपत की तरह ही भयंकर अस्त्र था। एक बार इसे चलाने के बाद दूसरा कोई अस्त्र इसे काट नहीं सकता था। इससे बचने का सिर्फ एक उपाय था कि शत्रु हथियार डालकर स्वयं को समर्पित कर दे।

 

आग्नेय अस्त्र

यह मंत्र शक्ति से तैयार ऐसा बाण था, जो धमाके के साथ आग बरसाता था और अपने लक्ष्य को जलाकर राख कर देता था। इसकी काट पर्जन्य बाण के जरिए संभव थी।

 

पर्जन्य अस्त्र

मंत्र शक्ति से सधे इस बाण से बिना मौसम बादल पैदा होते, भारी बारिश होती और बिजली कड़कती थी।

 

पन्नग अस्त्र

इस बाण को चलाने पर सांप पैदा हो जाते थे। इसकी काट गरुड़ अस्त्र से ही संभव थी। रामायण में भगवान राम व लक्ष्मण भी इसी के रूप नागपाश के प्रभाव से मूर्छित हुए थे।

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गरुड़ अस्त्र

इस अचूक बाण में मंत्रों के आवाहन से गरुड़ पैदा होते थे, जो खासतौर पर पन्नग अस्त्र या नाग पाश से पैदा सांपों को मार देते थे या उसमें जकड़े व्यक्ति को मुक्त करते थे।

 

वायव्य अस्त्र

मंत्र शक्ति से यह बाण इतनी तेज हवा और तूफान उत्पन्न करता था कि चारों ओर अंधेरा हो जाता था।

 

 

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