Mothers Day 2018: ज़िन्दगी जीना सिखाता है, माँ को नन्हा शैतान

- in जीवनशैली

“ज़िन्दगी की नई शुरआत होती है
जब हमारी ज़िन्दगी में आती है कोई नन्ही सी जान
वो सीखती हमसे बहुत कुछ
नई-नई चीजे सिखलाता है हमे ये नन्हा मेहमान”  Mothers Day 2018: ज़िन्दगी जीना सिखाता है, माँ को नन्हा शैतान

किसी ने सच ही कहा है की जब माँ एक बच्चे को जन्म देती है तो वह उसका भी पुनर्जन्म होता है.ज़िन्दगी में आया नन्हा मेहमान हर दिन नई नई अठखेलिया दिखाता है.एक नन्हा बालक अकेला इस दुनिया में नहीं आता है, उसके साथ आते है अनेक नए विचार एक नई चेतना, ये चेतना अन्नत फैलाव लाकर हमारे जीवन को एक विस्तार देती है. हमे जोड़ती है जीवन के हजारो अलग अलग रंगो से और एहसास करवाती है अनेक भावो और संवेदनाओ का.नन्हे क़दमों की धीमी धीमी आहट हमे सेकड़ो नई चाहतो से रूबरू करवाती है.उनकी मीठी किलकारियाँ और शरारते हमे ले जाते है प्रकृति के करीब.उनके आने से हमे याद आ जाता है अपना बीता जमाना. किस तरह जीये थे हमने अपने बचपन के दिन.सबसे ज़रूरी बात यह कि इस नई भूमिका में एक नारी सीखती कई नये अनुभव व हर चीज से प्रेम करना.

तेरे आने से शुरू हुआ एक नया जीवन

जब घर में कोई नन्हा मेहमान आता है तो उसके सीखने के साथ साथ हमारे भी सीखने की एक नई यात्रा शुरू होती है.उसके साथ बीता हुआ हर पल हमारे लिए एक नया अनुभव होता है.उनकी शरारते और मस्तिया हमे अपने बचपन के दिनों की सेर करा देती है.हम भी महसूस करने लगते है उन सभी मधुर दिनों को जब हमने भी इस मासूमियत का आनंद लिया था.दिल करता है की एक बार फिर बच्चो के संग बच्चे बनकर ज़िन्दगी का लुफ्त लिया जाए.बच्चे हमे एक नयी सोच,एक नया दृष्टिकोण देते है. बच्चे भर देते है जीवन में सच, नई ऊर्जा, सृजनात्मकता और मासूमियत.

हर तरफ बिखरी है प्रेम की खुशबू

मुझे लगता है कि मैंने कभी बदलते मौसम को इतने निराले अंदाज़ में नहीं देखा जिस अंदाज़ में मेरी नन्ही सी जान देखती है.फूलो ने मुझे आकर्षित तो किया लेकिन मेने कभी इन्हे अपना दोस्त नहीं बनाया.जिस तरह उसके दिल में तितली के लिए दीवानगी है मेरे मन में कभी किसी के लिए नहीं रही. उसे चींटी के काटने पर गुस्सा नहीं आता.उसे लगता है चीटी  थोड़ी शैतान है और उसे समजाइश की जरुरत है.

उसकी मधुर मोहक मुस्कान बन गयी है जीने की वजह
 
बच्चो की भोली और मधुर मुस्कान हर किसी को भाति है .बच्चो में  उल्लास हम से कही अधिक होता है और वे हमे बड़े से बड़े संकट में भी मुस्कुराना सीखा देते है.बच्चो के स्वभाव को हम अपने जीवन में उतार ले तो जीवन सच में बहुत सरल हो जाएगा.बीते दिन की टेंशन, दुःख और दर्द से आसानी मुक्ति मिल जायेगी, बच्चो को बातें घूमना नहीं आता वे सीधे सच्चे होते है शायद इसलिए किसी ने “बच्चे मन के सच्चे” की बात कही है. संचार का यह अदभुत कौशल हम बच्चो से आसानी से सीख सकते है.जो मन में हो उसे सीधे सीधे कह दो यह हुनर अगर हम सभी में आ जाये तो दिल के आधे बोझ तो आसानी से ख़त्म हो जायेगे.

मन को मिला संवेदनाओ का नया परिचय

मां बनकर यह भी महसूस किया की बड़े, बच्चों को हमेशा सिखाने में ही क्यों उलझे रहते हैं? मस्ती और मौज में भी बच्चे बहुत कुछ सीख सकते है.मुझे लगा था कि बच्चे को सीखना मेरी जिम्मेदारी है लेकिन मेरा नन्हा शैतान भी मुझे हर दिन कुछ नया सिखाता है.सिखाता है अपनी बात को दृढ़ता से कहना.अपने मन का करना और सामजिक दायरों से पर खुल कर जीना, टीवी पर प्रसारित एक धारावाहिक में बच्चे को पिटता देख उसने कहा, ‘दुखता है मम्मा, गाल भी दुखता है और दिल भी।’ अपने बेटे के इस वाक्य ने मेरे दिल को अंदर से तोड़ दिया और मुझे सोचने को मजबूर कर दिया. कितने गलत है हम जो अपने दर्द और कमजोरिया का गुस्सा उस मासूम पर निकाल देते है. उसकी यह बात एक गंभीर चिंतन का विषय बन गयी मेरे लिए।

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