क्या आप जानते हैं पेंगुइन की इस अनोखी दुनिया के बारे में

- in जीवनशैली

पेंगुइन कि अनोखी दुनिया:-

दोस्तों आज हम बात करेंगे बहुत ही रहस्यमयी जीव(पछी) की जिसे हम पेंगुइन नाम से जाने जाते है| जिसके हम पुतले देखते हैं | जो अक्सर मॉल और कई सार्वजनिक स्थानों में डस्टबिन के रूप में रखे दिखते  हैं | पेंगुइन कि दुनिया बहुत ही आश्चर्यजनक है | 

क्या आप जानते हैं पेंगुइन की इस अनोखी दुनिया के बारे में पेंगुइन ठण्डे इलाको में ही पाए जाते ये बहुत ही अनुशासन में रहने वाले पछी हैं| जब हमने पेंगुइन्स के बारे जानने की इच्छा अपने दोस्तों के सामने जाहिर की| तो सभी काफी ख़ुशी से मेरे साथ आने को तयार तो हुए पर सायद ये सब करपाना इतना आसान नहीं था|

क्योंकि एसी जगह जाना और लंम्बे  समय तक रुकना जहां पर मानो तो मानव जीवन असंभव सा लगता हो| पर इन सभी चीजों के बाद भी हमारे कुछ अच्छे और सच्चे दोस्त मेरे साथ आने को तयार हुए फिर हम सबने मिलके एक टीम  बनाई और निकल पड़े सच्चाई जानने के लिए|

हम अपने साथ सभी जरुरत कि चीजे लेके गए जिससे हम वह जिन्दा रह सके| फिर क्या था हम सभी निकाल पड़े| अपने इस रोचक और अनोखे सफ़र पे हमे कठिनाइयों का तो सामना करना पड़ा पर हम पेंगुइनस के जीवन का रहस्य जरुर ले आपके लिए|

जब हम अपने कठिन सफ़र के बाद पेंगुइन के पास पहुचे उसके बाद हम सब अपने सफर कि थकान और सारी मुशकिले भूल गए | हमने देखा पेंगुइन वहां पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर हैं |

सभी पेंगुइन भोजन से लेकर अपनी हर चीज के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, ये बहुत ही अनुशासन में रहते हैं और हाँ ये सभी बहुत ही सामाजिक भी होते हैं| इनका अपना एक अनोखा समाज है ये सभी एक झुण्ड में रहते हैं|

ये जब वयस्क हो जाते है तो प्रजनन के लिए अपने पसंद के साथी को चुनते हैं और हाँ देख के ऐसा लगता है की इस समाज में नर पेंगुइन अपना साथी चुनके प्रजनन करने के बाद काफी मेहनत करनी पड़ती हैं दुसरे तरीके से कहूँ तो हम इंसानों कि तरह ही इनकी भी जिन्दगी होती है|

ये सभी मादाएं प्रजनन के बाद झुण्ड में रहते हुए अपने बच्चो (चूजों) का ख्याल रखती हैं और सभी नर झुण्ड में रहते हुए खुद के लिए  और अपने परिवार के लिए भोजन लेने के लिए निकाल पड़ते हैं जो कि बहुत ही ज्यादा जोखिम भरा होता  है पर हम सबने सुना ही होगा कि जीना है तो खाना तो पड़ेगा ही| ये सफ़र  यहीं खत्म नहीं  होता|

अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए इन्हें 200 कि.मी. का सफ़र तय करना पड़ता है जिसमे इन्हें 2 दिन बिना रुके चलना होता है क्योंकि समुद्र एक अकेली जगह है जहा से इन्हें खाना मिल सकता है, समुद्र तक पहुच लगभग सभी जाते हैं पर लौट के वापस सभी नहीं आ पाते क्योकी वहां इन सुन्दर पेंगुनस कोई बेसबरी से इंतजार कर रहा होता है वो है यल्लो व्हेल वैसे तो पेंगुइन पानी में बहुत ही फुर्ती से तैर सकते हैं पर यल्लो व्हेल से बचना आसान नहीं होता है|

पेंगुइन को बहुत ही मसक्कत करके इन यल्लो व्हेल से बचना पड़ता है क्योंकि ये बहुत तेज होती है, और हाँ पेंगुइन कि एक अनोखी बात की वो मछलियों को अपनी थैली में रख कर बहुत ही लम्बे समय तक ताजा रख सकते है|

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