बूंदी जिले के रामगढ़ विषधारी वन क्षेत्र में टाइगर रिजर्व विकसित करने की कवायद

राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राजस्थान सरकार इसके निकट ही स्थित बूंदी जिले के रामगढ़ विषधारी वन क्षेत्र को टाइगर रिजर्व के रूप में रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल में इस बारे में विधानसभा में संकेत भी दिए थे। यदि विकसित हुआ तो यह राजस्थान का चौथा टाइगर रिजर्व होगा।
प्रसिद्ध रणथंभौर राजस्थान का सबसे पुराना टाइगर रिजर्व है। इसके साथ ही कैलादेवी और रामगढ़ विषधारी वन क्षेत्र भी हैं जो इसे कोटा में कुछ समय पहले घोषित किए गए मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से जोड़ते हैं। रामगढ़ विषधारी बूंदी जिले में स्थित है। यह करीब 307 किमी में फैला वन क्षेत्र घना है। इसमें बहने वाली मेज नदी में सालभर पानी भरा रहता है। इसके अलावा यहां बीहड़, कंदराएं, पहाड़ी, मैदानी क्षेत्र और नाले व घाटियां हैं, जो बाघों के विचरण के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। यही कारण है कि रणथंभौर से कई बार बाघ रामगढ़ क्षेत्र में आते रहे हैं। बताया जाता है कि 80 दशक में यहां करीब 14 बाघ थे जो धीरे-धीरे खत्म हो गए।
इस बीच, रणथंभौर से यहां बाघों का आना शुरू हो गया। राजस्थान सरकार ने कुछ समय पहले जिस मुकुंदरा हिल्स को टाइगर रिजर्व बनाया है, वहां सबसे पहले एक बाघ रामगढ़ होते हुए ही पहुंचा था। बाद में सरकार ने वहां तीन बाघ और भेज दिए। रामगढ़ को बाघों का बहुत अच्छा प्राकृतिक आवास माना जाता है। इसे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने के लिए वन विभाग यहां जूलीफ्लोरा वाले जंगल में 15 हेक्टेयर का चारागाह तैयार कर रहा है। इस जंगल में काफी संख्या में तेंदुए, चिंकारा, भालू, हिरण, भेडि़ए और अन्य वन्य जीव हैं लेकिन बाघों को स्थायी तौर पर बसाने के लिए यहां उनके शिकार का पक्का इंतजाम करना जरूरी है।
इसी दृष्टि से अब यहां काम किया जा रहा है। दरअसल, रणथंभौर में बाघों की संख्या इसके क्षेत्रफल के मुकाबले ज्यादा हो गई है। रणथंभौर में अभी 66 बाघ हैं और उनके शावक अलग है। ऐसे में यहां बाघों के बीच इलाके को लेकर अकसर आपसी संघर्ष की स्थिति रहती है। ऐसे में यहां से बाघों को दूसरी जगह ले जाना जरूरी होता जा रहा है। रामगढ़ विषधारी का टाइगर रिजर्व के रूप में विकास बूंदी में पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों विधानसभा में कहा था कि इसे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित करने पर सरकार विचार कर रही है। इससे पहले वन मंत्री सुखराम विश्नोई ने भी कहा था कि राजस्थान में अन्य वन क्षेत्रों में भी टाइगर रिजर्व की मांग आ रही है और हम इस बारे में प्राथमिक चर्चा कर चुके हैं। अब इस दिशा में आगे काम किया जाएगा।





