बिना मंजिल सफर से होटल में पड़े रहने तक, Gen-Z ने हर ट्रैवल मूड को दे दिया नया नाम

घूमने-फिरने के मामले में आज की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z ने एक बिल्कुल नई राह पकड़ ली है। अब सिर्फ उनके सफर करने का तरीका ही अलग नहीं है, बल्कि उनकी ट्रैवल डिक्शनरी भी पूरी तरह से बदल चुकी है।

जी हां, अगर आप भी सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हुए इन नए शब्दों को देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं, तो अब अपनी ट्रैवल डिक्शनरी अपडेट करने का वक्त आ गया है।

वाय-केशन (Why-cation)
क्या आपने कभी बिना यह सोचे अपना बैग पैक किया है कि जाना कहां है? अगर हां, तो Gen-Z की भाषा में आप ‘वाय-केशन’ पर थे। इस तरह की ट्रिप में मंजिल पहले से बिल्कुल तय नहीं होती। आपका मूड जैसा कहेगा, सफर उसी तरफ मुड़ जाएगा। अचानक मन किया तो पहाड़ों की तरफ निकल गए, या फिर समंदर की लहरें देखने चल दिए।

माइक्रोकेशन (Microcation)
भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय के लिए ऑफिस से छुट्टी लेना हमेशा मुमकिन नहीं होता। ऐसे में काम की थकान मिटाने का शॉर्टकट है ‘माइक्रोकेशन’। यह आमतौर पर एक से तीन दिन का एक छोटा-सा ट्रिप होता है। इसका इकलौता मकसद बिना ज्यादा छुट्टियां बर्बाद किए, रूटीन से बाहर निकलना और खुद को फटाफट तरोताजा करना होता है।

साइड-क्वेस्टिंग (Side-Questing)
साल में केवल एक बार किसी बहुत बड़ी ट्रिप का इंतजार करने की बजाय, पूरे साल कई छोटी-छोटी ट्रिप्स पर निकल जाने के ट्रेंड को ‘साइड-क्वेस्टिंग’ कहा जाता है।

रूम रॉटिंग (Room Rotting)
आमतौर पर लोग ट्रिप पर जाकर बाहर की जगहें एक्सप्लोर करना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को किसी खूबसूरत जगह जाकर भी अपने कमरे के अंदर कैद रहना ही भाता है। बिस्तर पर आराम से लेटे रहना, फोन स्क्रॉल करना, अपनी पसंदीदा वेब सीरीज निपटाना और बस सुकून से वक्त बिताना- आज की नई पीढ़ी इसे ‘रूम रॉटिंग’ कहती है।

होटलमॅक्सिंग (Hotelmaxxing)
जब कोई टूरिस्ट बाहर की दुनिया देखने के बजाय अपनी ट्रिप का सबसे ज्यादा वक्त उस प्रॉपर्टी या होटल के अंदर बिताता है, तो उसे ‘होटलमॅक्सिंग’ कहते हैं। इसमें होटल के शानदार स्पा, स्विमिंग पूल और बाकी सुख-सुविधाओं का जमकर मजा लिया जाता है।

मेन कैरेक्टर मोमेंट (Main Character Moment)
ट्रिप के बीच कई बार ऐसा वक्त आता है जब नजारे इतने खास होते हैं कि आपको लगने लगता है जैसे आप अपनी ही किसी फिल्म के लीड एक्टर हैं। मिसाल के तौर पर, ऊंचे पहाड़ों के बीच बिल्कुल अकेले बैठकर कुदरत को निहारना। इस शानदार एहसास को ‘मेन कैरेक्टर मोमेंट’ का नाम दिया गया है।

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