ऑनस्क्रीन ‘सरदार’ के रोल्स पर बोले Pavan Malhotra

हिंदी सिनेमा में चार दशक से ज्‍यादा समय से सक्रिय अभिनेता पवन मल्‍होत्रा (Pavan Malhotra) लगातार वैरायटी रोल निभा रहे हैं। वह सात अगस्‍त को रिलीज होने वाली अमित राय निर्देशित फिल्‍म ‘ओह माय डॉग’ (Oh My Dog) में नजर आएंगे।

इससे पहले वह अमित के साथ फिल्‍म ‘रोड टू संगम’ और ‘ओएमजी 2’ फिल्‍में भी कर चुके हैं। हालांकि, अमित के साथ शुरुआत में वह काम करने को राजी नहीं थे। तब अमित ने किसी और के जरिए उन्‍हें फोन करवाया था।

दोस्ती की असली परिभाषा

पवन मल्होत्रा इस बारे में कहते हैं, “दरअसल उसके निर्माता से मेरी कुछ समस्‍या थी। फिर हमने साथ में ‘रोड टू संगम’ की। सबसे पहली बार जब मैं उनके सेट पर गया और उनके साथ काम किया, तब मैंने उन्हें सबसे पहले एक रचनात्मक व्यक्ति एक निर्देशक और लेखक के रूप में देखा। उसके बाद दोस्ती हुई। हालांकि मेरे लिए दोस्ती और रचनात्मकता दो अलग-अलग चीजें हैं।

हो सकता है कि कल मैं उनकी फिल्‍म न करुं या किसी वजह से यह मुझे न लें। ऐसा भी हो सकता है कि कभी मैं उनसे नाराज हो जाऊं या वो मुझसे ऊंची आवाज में बात कर दें लेकिन दोस्ती तब भी रहेगी। बहुत सारे लोग हैं जिनके हम प्रशंसक है, लेकिन वो दोस्‍त नहीं हैं। मेरी लिए दोस्ती की परिभाषा अलग है।

कई बार इंटरव्यू में लोग कहते हैं कि फलां आपके दोस्त हैं, तो मैं कहता हूं कि नहीं, हम अच्छे परिचित हैं। मेरे दिल्ली के स्कूल और कॉलेज के कई दोस्त हैं, जिनसे सालभर बात नहीं होती लेकिन अगर मुझे उनकी जरूरत पड़े या उन्‍हें पड़े तो बिना हिचक एक-दूसरे को फोन कर सकते हैं। यह दोस्‍ती है।

डॉग पर बेस्ड फिल्म देखकर आया था रोना
आगे वह कहते हैं कि अगर आप रोड टू संगम देखें, तो बेहद सीमित बजट में बनी फिल्म अपना प्रभाव छोड़ती है। फिल्‍म ओमएमजी 2 बहुत साहसिक प्रयास था। ‘ओह माय डॉग’ में दो अलग-अलग राज्‍यों की कहानी चल रही है जो इमोशनली आपको जोड़ती है। जानवर की वफादारी और और निस्‍वार्थ प्रेम का अनुभव मैंने खुद किया है। बचपन में घर में पाला था। आज भी दिल्‍ली में मेरे घर में डॉग है। डॉग पर बनी फिल्‍म 777 चार्ली देखकर मैं तो बहुत रोया था।

हिंदी सिनेमा में डॉग को गाली के तौर पर भी इस्‍तेमाल किया जाता है। पवन का मानना है कि फिल्‍म देखने के बाद इस सोच में बदलाव आएगा। वह कहते हैं कि यह निर्भर करता है सोसाइटी पर। हम गाय के बारे में सम्‍मान से बात करते हैं। आप यूरोप में जाइए ब्रिटिशर्स किसी को गाली देते हैं तो ब्लडी काउ बोलते हैं। हम उल्लू को बेवकूफ बोलते हैं वो चालाक बोलते हैं। कुत्ता जितना वफादार तो कोई है ही नहीं।

कई बार यह भी कहा जाता है कि तुम क्या समझते हो मैं तुम्हारा कुत्ता हूं दुत्‍कारोगे तब भी तुम्हारा पास ही वापस आएगा। यह विरोधाभासी है। लेकिन अगर उसने एक बार आपसे कनेक्शन जोड़ लिया तो वो अपनी जान पर खेलकर भी आपको बचाएगा। यही फिल्‍म की कहानी है।

सरदार के रोल्स में जचते हैं एक्टर
फिल्‍म में पवन ने सरदार की भूमिका निभाई है। इससे पहले भी वह कई बार सरदार की भूमिका निभा चुके हैं। इन पात्रों को निभाने की जिम्‍मेदारी के सवाल पर वह कहते हैं कि मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे ऐसे पात्र मिले। फिल्‍म ‘जब वी मेट’ में तो मेरे किरदार पर लोग हंसते ही हैं। सब बोलते हैं कि सरदार बड़ा अच्छा करता है, लेकिन यह सभी बेहद अलग किरदार हैं। मेरे लिए बहुत बड़ा कांप्लिमेंट था ‘जब वी मेट’ के टाइम पर।

पाकिस्तान से आया था परिवार
मैं त्‍वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मारवा के पास रैशेज होने की वजह से मिलने गया था। चेकअप के बाद उन्होंने कहा कि आपने दिखाया असली सरदार कैसे होते हैं, पर लिखा तो किसी ने था। मैं थोड़ी स्क्रिप्ट लिखता हूं। हां ये अच्छा रहा कि पंजाब में भी आज भी कई लोग बोलते हैं आप पर पग बहुत फबती है और बड़ा अच्छा सरदार का रोल करते हो। तो मैं कहता हूं कि भाई मैंने केश नहीं रखे, लेकिन हूं तो पंजाबी। उसी जमीन से मेरे पूर्वज आए हैं। लाहौर से आए थे मेरे पैरेंट्स और हूं तो मैं पंजाबी।

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