आधार अपडेट को लेकर UIDAI शुरू करने जा रहा नई सेवा, जानें पूरा मामला!!

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) अगले साल अप्रैल से एक नई सेवा शुरू करेगा. इससे आधार कार्ड धारक आसानी से अपने पते में बदलाव कराने में सक्षम होंगे. इससे उन लोगों को मदद मिलेगी जिनके पास स्थानीय निवासी का प्रमाण नहीं होता है. धारक को सिर्फ एक पत्र और पिन संख्या के माध्यम से अपना पता बदलने की सुविधा मिलेगी.

यूआईडीएआई ने मंगलवार को एक अधिसूचना में जानकारी दी कि इस नयी सेवा को एक अप्रैल से शुरू करने का प्रस्ताव है. यूआईडीएआई ने कहा कि जिन रहवासियों के पास उनकी मौजूदा निवास स्थान का कोई मान्य प्रमाण नहीं है. वह पते के सत्यापन के लिए पिन कोड वाले आधार पत्र के माध्यम से अनुरोध कर सकते हैं. एक बार व्यक्ति को यह पत्र प्राप्त हो जाएगा तो वह इस कूट पिन के माध्यम से एसएसयूपी ऑनलाइन पोर्टल पर अपने आधार में पते का बदलाव कर सकते हैं।

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शहर से बाहर रहने वालों को तोहफा

बता दें कि इससे उन लोगों को लाभ होगा जो किराये के घर में रहते हैं या अपना शहर छोड़कर दूसरे शहरों या स्थानों पर श्रमिक के तौर पर काम करते हैं. यूआईडीएआई ने कहा कि इस नयी सेवा का प्रायोगिक परीक्षण एक जनवरी 2019 से शुरू होगा और एक अप्रैल 2019 से इसका परिचालन शुरू करने का प्रस्ताव है.

दिल्ली  हाईकोर्ट ने ये कहा

वहीं एक अन्य मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि शहर में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को मातृत्व योजना का लाभ देने के लिए आधार और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज अनिवार्य रूप से पेश करने की जिद पर अड़े रहने के लिए आम आदमी पार्टी सरकार के पास कोई कानूनी आधार नहीं है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) जैसी मातृत्व योजनाओं के तहत आने वाले पात्रों को फायदा देने के लिए ऐसे दस्तावेजों के लिए जोर नहीं डाला जाए.

अदालत ने सरकार को ऐसी योजनाओं के फायदों तथा पंजीकरण के लिए आवश्यक वस्तुओं के बारे में व्यापक प्रचार प्रसार करने के भी निर्देश दिए हैं क्योंकि अनेक महिलाओं को इसके बारे में जानकारी नहीं है. पीठ ने अपने आदेश में कहा, योजना (जेएसवाई) में इस प्रकार की कोई भी आवश्यकता (आधार) निर्धारित नहीं है. साथ ही कहा, जेएसवाई का लाभ देने के लिए प्रतिवादी (दिल्ली सरकार) को ऊपर वर्णित दस्तावेजों की मांग पर अड़ने का कोई कानूनी आधार नहीं है.

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