ये हैं वो स्त्रीयां जो शादीशुदा होने के बावजूद भी हैं पवित्र और कुंवारी, जानिए कैसे

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स्त्रीयों की पवित्रता को लेकर हमारे समाज में लगभग हर कोई प्रश्न उठाता है. एक औरत भले ही कितनी भी सच्ची और पवित्र क्यूँ ना हो, लेकिन लोग उसे भी शक की निगाह से देखते हैं. यहाँ तक की सीता माँ को भी अपने चरित्र को साबित करने के लिए कईं कठिन परीक्षायों से गुजरना पड़ा था. आज के इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी स्त्रीयों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें सदियों से पवित्र माना जाता है. हालांकि, इनमे से अधिकतर महिलाएं शादीशुदा होने के बावजूद भी हैं पवित्र स्त्रियां का दर्जा दिया जाता है.अब आपके मन में ये प्रश्न उठ रहा होगा कि भला कोई औरत शादी के बाद पवित्र और कुंवारी कैसे हो सकती है? तो हैरान मत होइये दोस्तों इसके पीछे का कारण जानने के लिए चलिए पढ़ते हैं इस पूरी ख़बर को.

ये हैं वो स्त्रीयां जो शादीशुदा होने के बावजूद भी हैं पवित्र और कुंवारी, जानिए कैसे अहिल्या

अहिल्या गौतम ऋषि की पत्नी थी और दिखने में वह बेहद सुंदर थी. दरअसल, भगवान इंद्र ने गौतम का रूप धारण करके अहिल्या के साथ कुछ समय बिताया था जिसके बाद ऋषि गौतम क्रोध में आ गए थे और उन्होंने इसी क्रोध के चलते अहिल्या को पत्थर बनने का श्राप दे दिया था. जबकि हकीकत में अहिल्या अपने पति के प्रति बेहद ईमानदार थी. अपने पतिव्रता स्वभाव के चलते अहिल्या ने गौतम का श्राप स्वीकार कर लिया और पत्थर बनकर जीवन गुजारना शुरू कर दिया. परंतु जब गौतम का गुस्सा शांत हुआ तो उन्होंने अहिल्या को श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए श्री राम के चरणों को छूने के लिए कहा. जब अहिल्या ने श्री राम के चरण छुए तो भगवान ने उन्हें पवित्र स्त्री कहा और इस तरह वह श्राप से मुक्त हो गई. उसके बाद से ही अभी तक अहिल्या को कुंवारी और पवित्र स्त्री माना जाता है.

तारा

तारा सुग्रीव के भाई बाली की पत्नी थी जिसका जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था. तारा का हाथ भगवान विष्णु ने खुद बाली के हाथों में दिया था. तारा की समझदारी के चर्चे हर तरफ थे. वह हर तरह की भाषा समझ सकती थी यहां तक कि प्राणियों की भाषा भी. एक बार वाली असुरों से लड़ने के लिए निकल पड़ा मगर वापस ना लौटने के कारण सबने उसे मरा हुआ समझ लिया जिसके बाद पूरा राज्य पाठ सुग्रीव ने संभाल लिया साथ ही सुग्रीव ने तारा को भी अपने अधीन ले लिया. परंतु जब बाली लौटकर आया तो उसने अपना राज्य सुग्रीव से वापस ले लिया और उसको राज्य से बाहर निकाल दिया.

जब सुग्रीव ने भगवान राम की शरण ली तो तारा ने बाली का गुस्सा शांत करने की कोशिश की. परंतु बाली गुस्से में उसी को छोड़कर चला गया. जिसके बाद भगवान श्री राम ने बाली का वध कर दिया. तारा को आज भी सबसे पवित्र स्त्री माना जाता है.

मंदोदरी

मंदोदरी बेहद सुंदर एवं सुशील स्त्री थी जिसका विवाह राक्षस यानी रावण के साथ हुआ था. मंदोदरी हमेशा रावण को सही और गलत का फर्क समझाती थी परंतु रावण उसकी बात को नहीं मानता था. रावण के वध के बाद भगवान राम ने विभीषण को मंदोदरी को सहारा देने के लिए कहा. अपने शांतमई गुणों के कारण आज भी मंदोदरी को कुंवारी माना जाता है.

द्रौपदी

महाभारत की द्रौपदी पांच पांडवों की पत्नी थी. द्रौपदी के मजबूत व्यक्तित्व के चलते आज भी उसे कुंवारी कन्याओं की श्रेणी में रखा जाता है. द्रौपदी ने अपने पूरे जीवनकाल में पांचों पांडवों का साथ दिया. इसके इलावा उसने एक भी पति के साथ अकेली रहने की जिद नहीं की. द्रोपदी को पाप का विनाश करने वाली माना जाता है.

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