इस मासूम लावारिस बच्ची को गोद लेने के लिए लोगों में लगी होड़ , वजह ही है कुछ ऐसी

वैसे हमारे देश में अपनी लड़की जब पेट में रहती है तो भ्रूण हत्या करवा देतें हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसे लावारिस बच्ची की कहानी सुनाने जा रहें हैं जिसे पाने के लिए लोगों में होड़ लगी हुई है |सभी बोल रहे मुझे दे दो तो मुझे दे दो | दरअसल यह बच्ची जंगल में लावारिस मिली  है  लेकिन इसके गोद लेने की  पीछे  कारण यह है कि यह बच्ची शिवलिंग के पास सोती मिली है  और शिवलिंग के पास मिलने के कारण लोग इसे गंगा का रूप समझ रहें हैं |बच्ची का मखमली तौलिया भी वहीं पड़ा था। ठण्ड काफी थी। जल्दी से बच्ची को उठाया और सीने से लगा लिया। करीब छह महीने की बिटिया थी। बच्ची को सबसे पहले देखने वाली जायदा कहती हैं- काश ! यह बच्ची मेरी होती। लावारिस हालत में मिली यह बच्ची अब मुरादाबाद से रामपुर के राजकीय बाल शिशु गृह आ गई है। जायदा के तीन बेटे और तीन बेटियां हैं, लेकिन मासूम बच्ची को सीने से लगाया तो लगा अपनी ही बच्ची को गोद में लिया है।

इस मासूम लावारिस बच्ची को गोद लेने के लिए लोगों में लगी होड़ , वजह ही है कुछ ऐसी

जायदा ने बच्ची के बारे में जब गांव के लोगों को बताया तो गांव में ही रहने वाली यासीन की पत्नी शब्बो ने कहा कि बच्ची हमें दे दो। जायदा मान गईं और बच्ची को शब्बो की गोद में दे दिया। शब्बो की गोद में एक बेटा है, उसे सीने से लगाए घर में चूल्हे किनारे बैठ गईं ताकि बच्ची को गर्मी मिल सके। शब्बो बताती हैं कि मैं बच्चे को अपना दूध पिलाना चाहती थी, लेकिन मैंने किसी संभावित डर से नहीं पिलाया, क्योंकि मामला पुलिस का हो गया था। बहरहाल, बच्ची को ऊपर का दूध पिलाया। शब्बो कहती हैं कि घर से थाने तक करीब 5 से 6 घंटे बच्ची उन्हीं की गोद में रही। बच्ची इतनी प्यारी है कि उसे छोड़ने का मन नहीं कर रहा है।

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साहब से कहा कि इसे हमें ही दे दो, लेकिन उन्होंने कहा ऐसे किसी को भी बच्चा नहीं दिया जा सकता है।संग्राम यादव कहते हैं कि मौके से थाने तक बच्ची 5 से 6 घंटे तक रही इस दौरान उसे लेने के लिए कई लोग सामने आए, जिसमें गांव के लोगों के अलावा पुलिस का एक सिपाही भी था। उसका कहना था कि भाई को बच्चे नहीं है अगर यह बच्ची मिल जाती तो उनकी जिंदगी बेहतर हो जाती। यही नहीं, जब मैं बच्ची को लेकर मेडिकल कराने अस्पताल गया तो वहां भी एक साहब ने कहा बच्ची हमें दे दो।उन्होंने बताया कि 9 फरवरी को ही बच्ची को बाल कल्याण समिति मुरादाबाद को सौंप दिया गया था। कुंदरकी थाने से होकर टीम जब बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष गुलजार अहमद के पास पहुंची तो उन्होंने बताया कि पहले 7-8 दिन में ही 250 से ज्यादा कॉल आ चुकी हैं। इसमें सीआरपीएफ अफसर से लेकर लोकल के कुछ जोड़े शामिल हैं।

गुलजार कहते हैं कि फिलहाल 2 महीने तक हम बच्ची के असली माता-पिता का इन्तजार करेंगे। उन्होंने बताया कि बच्ची को अडॉप्ट करने के लिए फ़िलहाल सीएआरए (सेन्ट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी) में अप्लाई करना होगा। इसके बावजूद जरूरी नहीं कि आपको यह बच्ची मिलेगी, क्योंकि पहले जिस बच्चे का नंबर होगा उसकी ही अडॉप्ट करना होगा।

 
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