खुलासे: PNB घोटाले की तरह देश भर में दबे पड़े हैं 8462 मामले, आखिर कैसे होगी इन सबकी रिकवरी?

- in Mainslide, कारोबार

देश में बैंक घोटालों की खबरों ने यह सोचने को मजबूर कर दिया है कि भारत में विलफुल डिफॉल्टर्स संख्या आखिर इतनी बढ़ कैसे गई। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने देश का पैसा लेकर भागे कारोबारियों को लेकर एक बड़ा सवाल किया है। उन्होंने अपने एक सवाल से विपक्ष को घेरा है। लोकसभा में अपने लिखित जवाब में शुक्ला ने कहा, ‘जैसा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बताया है, भारत में विलफुल डिफॉल्टर्स संख्या 9063 है।’ इससे पता चलता है कि इस वित्तीय वर्ष के पहले 9 महीनों में इसमें मात्र 1.66 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।’
यह अभी नीरव-मेहुल के मामले पर स्थिति है तो दूसरी तरफ वीडियोकॉन के एमडी वेणुगोपाल धूत पर भी सरकार की नजर है कि कहीं वो देश छोड़कर फरार ना हो जाएं। धूत भी नीरव, मेहुल की तरह विलफुल डिफॉल्टर हैं। तकरीबन 25000 करोड़ का लोन धूत पर भी है।

खुलासे: PNB घोटाले की तरह देश भर में दबे पड़े हैं 8462 मामले, आखिर कैसे होगी इन सबकी रिकवरी?हालाकि वीडियोकॉन के एमडी वेणुगोपाल धूत आश्वासन देते हुए यह बात कही है कि वो देश छोड़कर भागने वाले नहीं हैं। लेकिन क्या नीरव, मेहुल या माल्या ने यह कहा था कि वो पैसा लेकर भागेंगे।

जानिए कुल विलफुल डिफॉल्टर्स की संख्या

राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला के मुताबिक फ्रॉड में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का तकरीबन 11 हजार करोड़ रुपया फंसा है। माल्या और नीरव मोदी 25000 करोड़ रुपया लिए बैठे हैं। तो बाकी का पैसा कहां है?

शुक्ला ने कहा है कि पब्लिक बैंकों की रिपोर्ट के मुताबिक 31 दिसंबर 2017 तक 2108 एफआईआर विलफुल डिफॉल्टरों के खिलाफ दायर की हैं। वहीं 8462 मामलों में बैंकों ने कुर्की का मामला दायर किया है। ऐसे में फंसे हुए पैसे की रिकवरी कैसे होगी यह एक बड़ा सवाल है।

बात सिर्फ नीरव और मेहुल चोकसी की करें तो पंजाब नेशनल बैंक सहित 31 बैंकों से फर्जीवाड़े में पैसा लेकर भागने का मामला है। इससे सियासी गलियारों में हलचल है तो आम लोगों में डर का माहौल है। सियासत आरोप-प्रत्यारोप में ही उलझी है।
डिफॉल्टर्स कैसे हो जाते हैं फरार?

संसद भी कई दिनों से इसी मुद्दे पर गतिरोध की स्थिति में फंस रही है। ऐसे में यह मुश्किल हो चला है कि सदन आखिर चले कैसे। विपक्ष अपनी आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है तो सरकार का निशाना ही विपक्ष है।

विजय माल्या 11 सालों में देश के कई बैंकों के 9000 करोड़ से ज्यादा की रकम लेकर फरार हुआ। विजय माल्या की तरह ही गुप्ता बंधुओं ने ऐसी दो कंपनियों के नाम 54.5 मिलियन रेंड (दक्षिण अफ्रीकी मुद्रा) लोन लिया है, जिनके पास कोई एसेट ही नहीं थी। दोनों कंपनियों को अब दिवालिया बताकर दक्षिण अफ्रीका में केस फाइल कर दिया गया है, अभी मुकदमा चल रहा है।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि यह लोन दो भारतीय बैंकों (बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया) से लिया गया है। आयकर सूत्रों के मुताबिक गुप्ता बंधुओं ने दो कंपनियों कांफिडेंट कांसेप्ट और आइजलन साइट इनवेस्टमेंट के नाम से यह फ्रॉड किया गया।

कैसे पास हो जाता है इतना बड़ा लोन?

सात बैंकों के 3695 करोड़ रुपये का बकाया न चुकाने के आरोपी रोटोमैक कंपनी के विक्रम कोठारी व उसके पुत्र राहुल कोठारी को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एमपी. चौधरी ने 21 मार्च तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोर्ट ने विक्रम कोठारी की ओर से दी गई अंतरिम जमानत की अर्जी खारिज कर दी, जबकि विक्रम व राहुल की ओर से दी गई नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए 14 मार्च की तारीख तय की है।

इससे पहले आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद सीबीआई ने उन्हें कोर्ट के समक्ष पेश किया। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेजने का आदेश दिया। इसके बाद आरोपी विक्रम की ओर से नियमित व अंतरिम जमानत अर्जी जबकि राहुल की ओर से नियमित जमानत की अर्जी दी गई। कोर्ट ने जहां नियमित जमानत पर सुनवाई की तारीख तय कर दी, वहीं विक्रम कोठारी की अर्जी पर सुनवाई की।

कैसे खुलती है डिफॉल्टर्स की पोल?

रिड एंड टेलर ब्रांड से कपड़े बनाने वाली कंपनी के प्रमोटर नीतिन कासलीवाल को बैंकों ने विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। अब बैंक कंपनी को दिवालिया घोषित करने के लिए कोर्ट में चले गए हैं। आईडीबीआई बैंक और एडेलवाइस असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी ने एस. कॉमर्स एवं रिड एंड टेलर को दिवालिया घोषित करने का कदम उठाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

विलफुल डिफॉल्टर वो लोग होते हैं जिनके पास लोन की रकम चुकाने की क्षमता तो होती है, लेकिन वो पैसा वापस नहीं करते हैं। यह लोग लोन की रकम को भी किसी और काम के लिए डायवर्ट भी कर देते हैं। जो लोग अपनी संपत्ति को बैंक के पास लोन लेने के लिए गिरवी रखते हैं, लेकिन उसे बैंक की जानकारी के बिना बेच देते हैं, उनको भी इसी श्रेणी में रखा जाता है।

You may also like

अपने जीन्स में मौजूद कैंसर के खतरे से अनजान हैं 80 फीसदी लोग

दुनिया भर में कैंसर के मामलों में तेजी