पंजाब : थाने में बम फेंकने की घटना कहीं आतंकी हमला तो नहीं, जांच में 5 सच आए सामने
पंजाब के जालंधर में थाने में चार बम फेंककर हमला करने के पीछे आतंकियों का हाथ हो सकता है। मामले की प्राथमिक जांच में कई सच सामने आए हैं, आप भी जानिए।
पंजाब के जालंधर में ओल्ड अमृतसर रोड पर भीड़ भाड़ वाले इलाके मकसूदां स्थित थाने में चार बम फेंकने की घटना के पीछे आतंकी हाथ हो सकता है। दो घंटे तक घटना को शरारत समझने वाली स्थानीय पुलिस को आखिरकार रात 10.30 बजे काउंटर इंटेलिजेंस का सहारा लेना पड़ा। आतंकी घटनाओं की जांच के लिए गठित काउंटर इंटेलिजेंस के दोआबा के चीफ हरकंवलप्रीत सिंह खख खुद थाने आ पहुंचे और जांच शुरू कर दी।
हालांकि अधिकारी अभी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन दबी जुबान में कई वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि थाने की भीतर चार बम फेंकने की घटना को अंजाम देने आसान नहीं है। इतना ही नहीं बम को नुकीले पदार्थ भरकर तैयार किया गया था, जिससे एक दीवार में तो लंबे लंबे करीब 20 सुराख भी बन गए। थानेदार के कमरे के शीशे तक टूट गए। घटना की संवेदनशीलता को पुलिस ने दो घंटे बाद समझा और आखिरकार डीजीपी सुरेश अरोड़ा भी खुद थाने आ पहुंचे और मुआयना कर अधिकारियों को टिप्स दिए।
दरअसल, थाना मकसूदां एक खंडहरनुमा इमारत में है जिसकी दीवारें खस्ता हो चुकी हैं। गनीमत यह रही कि बम छत पर नहीं गिरे, अगर वहां गिरते तो इमारत ढह सकती थी। घटना करीब 8 बजे घटी तो पुलिस ने इसको सीरियसली नहीं लिया। कहा जाता रहा कि पेट्रोल बम फेंके गए हैं। पेट्रोल बम में कांच की बोतल का इस्तेमाल होता है। थाने में चारों स्पॉट पर कांच का कोई टुकड़ा नहीं मिला। फिर सवाल उठा कि क्या पोटाश यानी गंधक डालकर बम फेंका गया है। लेकिन थाने की एक दीवार पर नजर पड़ी तो देखा कि दीवार में सुराख हो चुके है।
इसका मतलब साफ था कि बम में नुकीली धातु डालकर इनको तैयार किया गया है और इसको तैयार करना आसान नहीं है। इसके लिए बकायदा ट्रेनिंग की जरूरत होती है। जब मौके से गंधक या पोटाश होने के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले तो मामले में पुलिस को संवेदनशीलता नजर आने लगी। अन्य बात यह भी थी कि किसी राहगीर या व्यक्ति ने थाने के भीतर बम को फेंकते नहीं देखा। किसी को कुछ पता ही नहीं चला कि कौन किधर से आया और कहां भाग निकला?
इसका मतलब साफ था कि जिसने भी वारदात को अंजाम दिया, वह पूरी तरह से ट्रेंड था और बकायदा वह पूरा प्लान तैयार कर थाने आया था। डीजीपी थाने पहुंचे तो उन्होंने मामले की जांच के लिए काउंटर इंटेलिजेंस टीम को संदेश भेज दिया। काउंटर इंटेलिजेंस चीफ हरकंवलप्रीत सिंह खख का कहना है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। फॉरेंसिक टीमों को बुलाया गया है, वह जांच कर रही हैं।
पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा की शहर में मौजूदगी के बावजूद किसी ने शुक्रवार रात को मकसूदां थाने में चार बम फेंककर पुलिस तंत्र को हिला दिया। धमाकों में हेड कांस्टेबल परमिंदरजीत सिंह घायल हो गए। उन्हें तत्काल निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया। वहीं इंस्पेक्टर रमन कुमार की आंख में ब्लास्ट के बाद उछला शीशा लगा। हालांकि उन्हें गंभीर चोट नहीं आई है। बम इतने शक्तिशाली थे कि दीवार पर छेद हो गए। घटना रात करीब आठ बजे हुई। इसके बाद इलाके में अफरातफरी मच गई।
सूचना पाकर डीजीपी सुरेश अरोड़ा, एडीसीपी सिटी परमिंदर समेत एसएसपी देहाती नवजोत सिंह माहल घटनास्थल पर पहुंचे। जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों ने थाने को सील कर दिया और मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी। कमिश्नर प्रवीण सिन्हा का कहना है कि प्राथमिक जांच में सामने आ रहा है कि किसी शरारती ने थाने की चाहरदीवारी के अंदर बम फेंके और भाग गया। ये कौन से बम हैं, इसकी जांच हमारी टीमें कर रही हैं। उस समय थाने में एसएचओ रमन कुमार और पुलिस कर्मी के अलावा मुंशी भी मौजूद थे। सबसे पहले एसएचओ के कमरे के बाहर धमाका हुआ।
एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, धमाकों के बाद उसने पुलिस मुलाजिमों को थाने से बाहर भागते देखा। इसके बाद पुलिस वाले थाने में आए और फिर गेट बंद कर दिया गया। गौरतलब है कि डीजीपी सुरेश अरोड़ा जालंधर में पुलिस गेम्स का उद्घाटन करने के लिए पीएपी में आए थे। ब्लास्ट के बाद पुलिस ने मीडिया को गुमराह करने की कोशिश की। पहले कहा गया कि बैटरी फट गई है। फिर कहा कि मालखाने में पड़े सामान में से कुछ फटा है। फिर कहा गया कि मोटरसाइकिल की बैटरी फटी है। मामले में देर रात तक पुलिस इधर-उधर मीडिया को घुमाती रही।





