म्यामांर के राष्ट्रपति टिन क्याव ने दिया इस्तीफा

म्यामांर के राष्ट्रपति टिन क्याव ने अचानक बुधवार को इस्तीफा दे दिया। बताया जाता है कि स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने यह फैसला लिया। क्याव म्यांमार की नेता आंग सान सू की के भरोसेमंद थे। माना जा रहा है कि सू की के एक अन्य वफादार विन मिइंट क्याव का स्थान लेंगे। सू की के करीबी ने ऐसे समय में उनका साथ छोड़ा जब रोहिंग्या समुदाय पर अत्याचार को लेकर उन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव है।

म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि मौजूदा जिम्मेदारियों से विश्राम लेने के लिए क्याव ने इस्तीफा दिया। कुछ महीनों से उनके स्वास्थ्य को लेकर अटकलें चल रही थीं। उन्हें वजन कम होने और हृदय संबंधी समस्याएं थीं। राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, अगले सात दिनों के भीतर नए राष्ट्रपति का चयन हो जाएगा। सैनिक शासन के तहत बनाए गए म्यांमार के संविधान में सू की के शीर्ष पद संभालने पर रोक है। राष्ट्रपति के तौर पर क्याव की भूमिका औपचारिक थी। बतौर स्टेट काउंसलर वास्तविक शासन सू की के हाथ में है। क्याव 1962 के बाद से म्यांमार के पहले असैनिक राष्ट्रपति थे।

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सू की के वफादार विन मिइंट के नया राष्ट्रपति बनने की संभावना है। बुधवार को उन्होंने म्यांमार की संसद के निचले सदन के स्पीकर के पद से इस्तीफा दिया। बताया जाता है कि संसद में उनकी अच्छी पकड़ है। नया राष्ट्रपति चुने जाने तक उपराष्ट्रपति मिइंट स्वे कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाए जाएंगे। पूर्व जनरल स्वे सेना की पसंद के उपराष्ट्रपति हैं।

म्यांमार शासन व्यवस्था

म्यांमार में सेना के साथ सत्ता साझा कर शासन चल रहा है। इसके तहत सेना के पास अब भी व्यापक राजनीतिक और आर्थिक अधिकार हैं। संसद की एक चौथाई सीट सेना के लिए आररिक्षत हैं। गृह, रक्षा और सीमा जैसे प्रमुख मंत्रालयों पर सेना का नियंत्रण है।

इसलिए वह अपने हिसाब से सुरक्षा अभियान चलाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। इसी के चलते सू की समर्थक रखाइन प्रांत में रोहिंग्या के खिलाफ कार्रवाई के मामले में उनकी सरकार का हाथ बंधा होने की बात कहते हैं। हालांकि आलोचकों का कहना है कि उन्हें इस मामले में सेना के खिलाफ बोलना चाहिए।

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