2024 की करारी हार पर डेमोक्रेटिक पार्टी की रिपोर्ट सार्वजनिक

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 में डोनल्ड ट्रंप के हाथों कमला हैरिस की ऐतिहासिक हार के दो साल बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने 192 पन्नों की एक समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक की है। रणनीतिकार पॉल रिवेरा द्वारा तैयार इस रिपोर्ट ने पार्टी के भीतर के गहरे मतभेदों और अंतर्विरोधों को उजागर कर दिया है।

डेमोक्रेटिक रणनीतिकार पॉल रिवेरा की रिपोर्ट के मुताबिक, भारी मात्रा में चुनावी चंदा जुटाने और राष्ट्रपति जो बाइडन के रेस से हटने के बाद मिले शुरुआती उत्साह के बावजूद, कमला हैरिस 2024 का राष्ट्रपति चुनाव डोनल्ड ट्रंप से हार गईं। इस चुनाव में डेमोक्रेट्स ने लगातार यह चेतावनी भी दी थी कि ‘मागा’ (MAGA) के मुखिया ट्रंप अमेरिकी लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा हैं, फिर भी वे जनता का भरोसा नहीं जीत सके।

इसके साथ ही इस रिपोर्ट ने किसी बड़े खुलासे के बजाय खुद डेमोक्रेटिक पार्टी की ही पोल खोलकर रख दी है, जो अब भी इस बात पर बुरी तरह बंटी हुई है कि आखिर उनसे चूक कहां हुई।

रिपब्लिकन पार्टी ने उठाया फायदा

रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने आप्रवासन, सार्वजनिक सुरक्षा और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खो दी, जिसका पूरा फायदा रिपब्लिकन पार्टी ने उठाया। रिपब्लिकन ने सफलतापूर्वक कमला हैरिस को बाइडन प्रशासन की एक अप्रभावी और नाकाम कर्ता-धर्ता के रूप में पेश किया।

हालांकि, इस रिपोर्ट में जो बाइडन के उस विनाशकारी फैसले की कोई गहन पड़ताल नहीं की गई है, जिसमें उन्होंने उम्र की चिंताओं को दरकिनार कर दोबारा चुनाव लड़ने की जिद की थी और बहस (debate) में बेहद खराब प्रदर्शन के बाद ही पीछे हटे। इसके बाद जुलाई 2024 में बाइडेन के हटने के बाद, बिना किसी प्रतिस्पर्धी प्राइमरी चुनाव के ही हैरिस को पार्टी का उम्मीदवार बना दिया गया था।

डेमोक्रेट्स की इस गलती ने पार्टी के कई नेताओं को नाराज कर दिया। उनका मानना है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब भी नैन्सी पेलोसी और चक शूमर जैसे वरिष्ठ नेताओं को जवाबदेही से बचा रहा है।

कड़वी सच्चाईयां उजागर

इस रिपोर्ट के निष्कर्ष ने किसी नए खुलासे के बजाय उन्हीं कड़वी सच्चाइयों का खुलासा किया है, जिन पर डेमोक्रेट्स पिछले दो सालों से टीवी और आपसी चर्चाओं में बहस कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी लातीनी मतदाताओं, पुरुषों, ग्रामीण अमेरिकियों और युवाओं को अपने साथ जोड़ने में पूरी तरह नाकाम रही और पारंपरिक मीडिया पर ही निर्भर बनी रही। यहां तक कि ट्रंप के अभियान ने बराक ओबामा की 2008 की संगठनात्मक रणनीति से खुद डेमोक्रेट्स की तुलना में कहीं ज्यादा सीखा और उसे जमीन पर उतारा।

नहीं दूर हो सकी जनता की नारजगी

चुनाव के दौरान कमला हैरिस ने महज 107 दिनों के अभियान में लगभग 1 अरब डॉलर जुटाए, लेकिन फिर भी वे अर्थव्यवस्था, इमिग्रेशन और आम लोगों से कटे ‘एलीट वर्ग’ के प्रति जनता की नाराजगी को दूर नहीं कर सकीं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि डेमोक्रेटिक नेशनल कमिटीके चेयरमैन केन मार्टिन ने इस रिपोर्ट को प्रकाशित करते समय खुद इससे पल्ला झाड़ लिया और माना कि यह दस्तावेज अधूरा है और इसमें पर्याप्त सोर्सिंग की कमी है।

2028 में भी दिख रही है मुश्किल

यह नाकामी 2028 की ओर बढ़ते हुए पार्टी की बड़ी मुश्किलों को दिखाती है। एक तरफ पार्टी के पुराने और स्थापित नेता हैं, जिनका मानना है कि ट्रंप प्रशासन के खिलाफ केवल बेहतर संगठन और आक्रामक संदेश की जरूरत है। वहीं दूसरी तरफ, युवा एक्टिविस्ट्स का, जिनका मानना है कि पार्टी की समस्या कहीं अधिक गहरी है, एक ऐसी लीडरशिप संस्कृति जो जोखिम लेने से बचती है, कंसल्टेंट्स के इशारे पर चलती है, और असली वैचारिक टकराव से डरती है।

2026 पर कोशिश

फिलहाल, डेमोक्रेट्स अपना पूरा ध्यान 2026 के मध्यावधिचुनावों पर लगाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां उन्हें उम्मीद है कि ट्रंप की ध्रुवीकरण की राजनीति रिपब्लिकन-विरोधी वोटों को एक साथ लाने में मदद करेगी। इसके बावजूद, पार्टी के सामने एक बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित है कि क्या ट्रंप की यह ऐतिहासिक जीत महज एक इत्तेफाक (अपवाद) थी, या फिर यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी मतदाताओं के एक बहुत बड़े हिस्से से हमेशा के लिए कट चुकी है।

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