उत्तराखंड में नहीं थम रहा है जंगली जानवरों का कहर, पलायन करने को मजबूर हैं लोग

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देहरादून: 71 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड के वन्यजीव भले ही उसे विशिष्टता प्रदान करते हों, लेकिन ये स्थानीय निवासियों के लिए मुसीबत का सबब भी बने हुए हैं। न घर-आंगन सुरक्षित है और न खेत खलिहान। ऐसे में लोग न सिर्फ खेती से विमुख हो रहे, बल्कि गांव छोड़ने को मजबूर भी।उत्तराखंड में नहीं थम रहा है जंगली जानवरों का कहर, पलायन करने को मजबूर हैं लोग

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की अंतरिम रिपोर्ट भी इसकी तस्दीक करती है, जो बताती है कि पलायन करने वाले लोगों में से 5.61 फीसद ने वन्यजीवों के कारण गांव छोड़ना मुनासिब समझा। रिपोर्ट यह इशारा भी करती है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष थामने को ठोस कदम उठाने की दरकार है। राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष अब चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है।

पिछले छह सालों के आंकड़े ही देखें तो इस वक्फे में वन्यजीवों के हमले में 257 लोगों को जान गंवानी पड़ी, जबकि 1400 से अधिक घायल हुए। यही नहीं, फसल, भवन व पशुधन को भी वन्यजीवों ने खासा नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग के पिछले साल के आंकड़े ही देखें तो जंगली जानवरों ने 486 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलों को चौपट कर डाला। सूरतेहाल, लोगों के गांव छोड़ पलायन करने के पीछे वन्यजीवों का खौफ भी बड़ी वजह निकलकर सामने आया है। 

पलायन आयोग की रिपोर्ट बताती है कि सभी जिलों में वन्यजीव खेती को खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं। अल्मोड़ा में सबसे अधिक 10.99 फीसद खेती को वन्यजीव चौपट कर रहे हैं, जबकि हरिद्वार में सबसे कम 0.82 फीसद। हालांकि, मानव-वन्यजीव संघर्ष को थामने के लिए राज्य गठन के बाद से ही बातें तो हो रही हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है। कभी वन सीमा पर सुरक्षा दीवार तो कभी सोलर फैसिंग, खाई खुदान जैसी बातें हुई, लेकिन इनसे संबंधित योजनाएं परवान नहीं चढ़ पाई हैं। जाहिर है कि अब सरकार को इस दिशा में गहनता से मंथन कर ठोस कार्ययोजना तैयार करनी होगी। 

वन्यजीवों के कारण गांव छोड़ने वाले लोग 

जिला————संख्या (फीसद में) 

अल्मोड़ा———–10.99 

चंपावत————-6.65 

नैनीताल————6.38 

पौड़ी—————–6.27 

रुद्रप्रयाग———–5.11 

टिहरी————–4.26 

पिथौरागढ़———4.08 

उत्तरकाशी——–4.04 

बागेश्वर————3.42 

चमोली————-3.09 

ऊधमसिंहनगर—-2.60 

देहरादून———–1.65 

हरिद्वार———–0.82 

यह है हाल 

-257 लोगों की छह साल के दौरान वन्यजीवों के हमले में मौत 

-1486 लोग इस अवधि में हुए घायल 

-26 हजार से अधिक मवेशी बने वन्यजीवों का निवाला 

-8187 पालतू जानवर पिछले वर्ष वन्यजीवों ने मारे 

-486.348 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़ी फसलें पिछले साल रौंदी 

-66 भवन गत वर्ष जंगली जानवरों ने तोड़ डाले

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