हालिया अध्‍ययन की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि रिटायरमेंट के बाद जहां पुरुषों की सेहत में सुधार होता है, वहीं महिलाओं की सेहत पर रिटायरमेंट का कोई सकारात्‍मक असर नहीं होता. इस अध्‍ययन को पेरिस के सोरबोन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है. इनमें से एक अर्थशास्‍त्र के प्रोफेसर क्‍लॉडिया सेनिक ने कहा कि शोध के नतीजे आने से पहले मैंने उम्‍मीद की थी कि रिटायरमेंट के बाद लोगों की सेहत खराब हो जाती होगी. लेकिन मैं गलत थी. क्‍लॉडिया ने कहा कि मुझे लगा था कि नौकरी से रिटायर होने के बाद लोग उदासी महसूस करेंगे. खासतौर से यदि उनका अपने काम से बेहद लगाव रहा है तो उनके लिए काम से छुट्टी पाना सोशल लॉस की तरह होगा. लेकिन आंकड़े कुछ और ही बयां कर रहे हैं.

अध्‍ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने रिटायर होने वाले लोगों की सेहत का अध्‍ययन किया और सेहत को लेकर उनकी क्‍या अपेक्षाएं हैं यह भी पूछा. ऑस्‍ट्रेलिया में 14 साल तक चलने वाले इस अध्‍ययन में 50 से 75 साल के लोगों को शामिल किया गया.

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अध्‍ययन में जो आंकड़े आए हैं उसके अनुसार रिटायर होने के बाद पुरुषों की सेहत में 5 फीसदी का इजाफा देखा गया. हालांकि महिलाओं की सेहत पर इसका कोई प्रभाव नहीं हुआ. ऐसा इसलिए है क्‍योंकि हो सकता है कि वह पहले से ही हेल्‍दी लाइफ जीती हों.

क्‍लॉडिया ने कहा कि महिलाएं अपनी सेहत के प्रति पुरुषों से कहीं ज्‍यादा सचेत होती हैं और स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर सही समय पर सही फैसले करती हैं.