दिल्ली में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से हुई फलों और सब्जियों के दामों में वृद्धि

नई दिल्ली। देशव्यापी ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब उत्तरी दिल्ली के आजादपुर मंडी में भी दिखाई दे रहा है। चक्का जाम का असर अब मंडी के कामकाज पर पड़ने लगा है, क्योंकि फलों और सब्जियों के वाहनों की संख्या कम होने लगी है। ऐसे में कीमतें प्रभावित होना स्वभाविक है। फलों और सब्जियों की कीमतों में 10-25 फीसद की बढ़ोतरी हुई है।दिल्ली में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से हुई फलों और सब्जियों के दामों में वृद्धि

दरअसल, दूर राज्यों से आने वाले फल-सब्जी के वाहन हड़ताल की वजह से मंडी तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। डीजल-पेट्रोल के बढ़े हुए दाम और टोल-टैक्स जैसी मांगों को लेकर पिछले छह दिनों से चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के खत्म होने की अभी तक कोई सुगबुगाहट नहीं है। ऐसे में इसका असर और तेजी से बढ़ सकता है और खुदरा बाजार में भी कीमतों में उछाल की आशंका है।

मंडी के आढ़तियों और व्यापारियों के अनुसार मंडी में हर रोज करीब एक हजार फल-सब्जी के वाहन आते हैं, लेकिन हड़ताल की वजह से इसकी संख्या घटकर 600-700 हो गई है। टमाटर और मौसमी के आढ़ती के अनुसार प्रतिदिन 25-30 गाड़ियां आती थीं, लेकिन अब इनकी संख्या 10-15 रह गई है। इस वजह से सब्जियों के दाम में उछाल आ गया है। बाजार में टमाटर की कीमत जहां पहले 20-25 रुपये प्रति किलो थी अब उसकी कीमत 35-40 हो गई है।

सरकार की नीतियों के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों का प्रदर्शन

उत्तरी दिल्ली के संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में बुधवार को सरकार की नीतियों खिलाफ ट्रांसपोर्टरों ने प्रदर्शन किया और सांकेतिक शवयात्र निकाली। इस दौरान पोस्टर-बैनर के साथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई। हड़ताल के पांच दिन गुजरने के बाद भी सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने पर ट्रांसपोर्टरों ने नाराजगी जताई और कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। इससे पूर्व ट्रांसपोर्टरों ने राष्ट्रीय स्तर पर बैठक बुलाई, जिसमें सरकार की नीतियों और चक्का जाम में तेजी लाने को लेकर चर्चा हुई। इस मौके पर ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि सरकार की ओर से हड़ताल को दबाने के लिए सीआरपीएफ की तैनाती कर दी गई है।

मौके पर दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के चेयरमैन (दिल्ली-एनसीआर) तरलोचन सिंह ढिल्लो ने कहा कि सरकार दमनकारी रवैया अपना रही है और गलत नीतियों की वजह से चक्का जाम को मजबूती मिल रही है। ऐसे में इस बार आर-पार की लड़ाई होगी। ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के चेयरमैन कुलतरण सिंह अटवाल ने बताया कि अब तक सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। उधर, हड़ताल को लेकर इलाके में हर तरफ पोस्टर और बैनर देखने को मिल रहे हैं। यहां खड़े ट्रकों पर बड़े-बड़े अक्षरों में चक्का जाम लिखकर सरकार को संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है।

हजारों कर्मचारियों-मजदूरों के सामने गहराया काम का संकट

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर कारोबारियों व दुकानदारों पर ही नहीं बल्कि हजारों मजदूरों पर भी देखने को मिल रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर थोक बाजारों में है, जहां सामान की आवाजाही नहीं हो पा रही है। पैकिंग व लोडिंग-अनलोडिंग से जुड़े कर्मचारियों और मजदूरों के पास काम नहीं है। पुरानी दिल्ली के ही 20 हजार से अधिक मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, जिसमें सदर बाजार, नया बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, चांदनी चौक, बल्लीमारान व मोरी गेट समेत अन्य थोक बाजार के मजदूर शामिल हैं।

फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश यादव के मुताबिक, बाजार में काम पूरी तरह ठप है। दूसरे राज्यों से व्यापारी भी नहीं आ रहे हैं। दिल्ली के भीतर या दूसरे माध्यमों से माल ले जाया जा रहा है। बमुश्किल 10 फीसद का कारोबार रह गया है। सदर बाजार में ही मजदूरी करने वाले मोहन ने बताया कि वह अपनी हाथ ठेली 50 रुपये प्रतिदिन किराये पर लेकर बाजार आते हैं, लेकिन हड़ताल के कारण काम नहीं है।

स्थिति यह है कि ठेली का किराया भी नहीं निकल पा रहा है। अगर यही स्थिति चलती रही तो खाने-पीने का भी संकट पैदा हो जाएगा। कमोबेश यह स्थिति सदर बाजार में काम करने वाले 5000 से अधिक मजदूरों की है। चावड़ी बाजार के मजदूर रमेश ने कहा कि अगर यही हालात रहे तो वह बिहार लौटने को मजबूर हो जाएंगे। चांदनी चौक में कपड़े की दुकान पर काम करने वाले बाबू लाल शर्मा के मुताबिक, ट्रकों की हड़ताल से माल पैकिंग से जुड़े कर्मचारियों के पास फिलवक्त कोई काम नहीं है। हालांकि, उन्हें मासिक वेतन मिलता है, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता गहराने लगी है।

प्रति ट्रक 7000 रुपये का नुकसान झेल रहे ट्रांसपोर्टर

हड़ताल में शामिल ट्रांसपोर्टरों को भी जोरदार आर्थिक झटका लग रहा है। चालक व हेल्पर के वेतन, खान-पान, पार्किंग चार्ज, बैंक की किस्त व टैक्स समेत अन्य खर्चों के कारण ट्रांसपोर्टरों को प्रति ट्रक करीब सात हजार रुपये की चपत लग रही है। एक अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में ही 60 हजार से अधिक ट्रक खड़े हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टर रोजाना करीब 40 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रहे हैं, जो हड़ताल के छठवें दिन करीब 240 करोड़ रुपये का हो गया है। फिलहाल केंद्र और ट्रांसपोर्टरों में सुलह समझौते का कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है।

ये हैं मांगें

20 जुलाई से शुरू अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने अपनी मांगों का पोस्टर लगाया हुआ है। इसमें डीजल की कीमतों को कम करने, टोल बैरियर मुक्त करने, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में टीडीएस समाप्त करने, बसों और पर्यटन वाहनों के लिए नेशनल परमिट सहित अन्य मांग शामिल हैं।

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