खुलासा: दाती महाराज के आश्रम में बिना रिकॉर्ड के रह रही कई छात्राएं

अपनी ही शिष्या से रेप के आरोप में फंसे जाने-माने ज्योतिषाचार्य और धर्मगुरु दाती महाराज के पाली स्थित आश्रम और आश्रम में चल रहे बोर्डिंग स्कूल में भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है. राजस्थान महिला आयोग ने दाती महाराज के आश्रम की जांच में यह अनियमितताएं पाईं. महिला आयोग का कहना है कि दाती महाराज के पाली स्थित आश्रम में चल रहे बोर्डिंग स्कूल और कॉलेजों में किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा. दाती महाराज के आश्रम में चल रहे स्कूल-कॉलेजों में बरती जा रही अनियमितता को लेकर राज्य महिला आयोग ने जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

महिला आयोग का कहना है कि आश्रम में चल रहे स्कूल और कॉलेजों के पंजीकरण का नवीनीकरण पिछले तीन साल से नहीं कराया गया है. इतना ही नहीं स्कूल और कॉलेज के लिए बने छात्रावासों में रह रहीं छात्राओं के बारे में इस तरह का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि वे कहां से ताल्लुक रखती हैं.

राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने बताया कि आश्रम में कितनी लड़कियां हैं, इसका भी कोई रिकॉर्ड नहीं है. एक नोटबुक में केवल सौ लड़कियों के नाम दर्ज थे. उन्होंने कहा, ‘आश्चर्य की बात यह है नोटबुक में लड़कियों के पिता का नाम कुछ और तो शपथ-पत्र में कुछ और है. साथ ही आयु संबंधित सूचना भी झूठी मालूम पड़ रही है.’

शर्मा ने कहा, ‘जब मेरी टीम आश्रम गई, तो हमें वहां दो लोग मिले, जिसमें से एक ने खुद को प्रधानाचार्य और दूसरे ने खुद को बतौर कैशियर पेश किया. जब उनसे शिक्षा विभाग की एनओसी के बारे में पूछा गया तो उन्हें इस बारे में पता ही नहीं था. ये अनाथ लड़कियां कहां से आई हैं और कब से यहां रह रही हैं, इसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला. स्कूल, कॉलेज और छात्रावास का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला.’

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उन्होंने यह भी बताया कि आश्रम के कर्मचारियों ने जांच करने पहुंची महिला आयोग की टीम का सहयोग तक नहीं किया. महिला आयोग के मुताबिक, उन्हें दाती महाराज के आश्रम में चल रहे इस स्कूल में 151 लड़कियों के होने की बात पता चली थी. लेकिन जब महिला आयोग की टीम आश्रम के स्कूल पहुंची तो वहां परिसर में 253 लड़कियां पाई गईं. महिला आयोग का कहना है कि अधिकांश लड़कियां गुजरात के गोधरा और राजस्थान के उदयपुर से ताल्लुक रखती हैं और आदिवासी समुदाय से आती हैं.

महिला आयोग की टीम ने जब परिसर में मौजूद इन छात्राओं से बात करनी चाही, तो वे काफी डरी-सहमी हुई लगीं और उन्होंने कई बार बयान बदले. कभी वे कह रही थीं वे 15 दिन पहले ही आश्रम आई थीं, जबकि अगली बार उन्होंने बताया कि उन्हें आश्रम आए 30 दिन हो गए हैं. छात्राओं के बार-बार बदलने से भी महिला आयोग की टीम को शंका हुई.

जिला कलेक्टर को लिखे एक पत्र में पूछा गया है कि इस आश्रम में रिकॉर्ड की जांच के लिए कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई और सामाजिक न्याय विभाग को इन लड़कियों को अपनी हिरासत में लेने के लिए कहा गया है.

महिला आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेज दी है और तीन दिन में जवाब मांगा है. सुमन शर्मा ने कहा कि तीन दिन तक हम जवाब का इंतजार करेंगे और उसके बाद  हमारा अगला कदम क्या होगा, इस पर फैसला लेंगे.

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