HRD की तैयारी, अब हर बोर्ड में होगी एक जैसी पढ़ाई और परीक्षा!

पिछले कुछ समय से CBSE की मॉडरेशन पॉलिसी चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी के चलते इस बार CBSE का रिजल्ट जारी होने में भी काफी देर हो गई। खबर है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस पॉलिसी को जल्द ही समाप्त करेगा और इसकी जगह अगले सत्र यानि साल 2018 से ज्यादा बेहतरीन साइंटिफिक मॉडरेशन पॉलिसी लागू की जाएगी। हालांकि CBSE बोर्ड में ग्रेस मार्क्स देने की इस पॉलिसी को इस साल से ही समाप्त करने वाली थी लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी थी। 
HRD की तैयारी, अब हर बोर्ड में होगी एक जैसी पढ़ाई और परीक्षा!
 

ग्रेस मार्क्स देने की इस पॉलिसी को खत्म करने के लिए एचआरडी मंत्रालय ने एक इंटर बोर्ड वर्किंग ग्रुप (IBWG) का गठन किया है। IBWG में आठ बोर्ड शामिल हैं, जो ग्रेस मार्क्स देने की परंपरा पर रोक लगाने के लिए योजना तैयार करेंगे। ये ग्रुप नियमित रूप से चर्चा करेगा और एक ऐसा मॉडल तैयार करेगा जिसका फैसला सभी बोर्ड्स को मानना होगा। 

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कुछ जरूरी विषयों का सभी बोर्ड्स का सामान्य पाठ्यक्रम भी होगा। ग्रेस मार्क्स पॉलिसी वेबसाइट्स पर अपलोड की जाएगी और कुछ विषयों के लिए मार्क्स एवं ग्रेड्स अलग से देने होंगे। इसके अलावा असेसमेंट में समानता लाने के लिए CBSE के साथ दूसरे बोर्ड्स को प्रश्नपत्र साझा करने की भी योजना है।
 

एचआरडी के एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार इस योजना के मुताबिक इस साल मॉडरेशन पॉलिसी को समाप्त नहीं किया जा सका। अगले साल तक इस योजना पर सभी बोर्ड्स अमल करेंगे। इस दिशा में काम किया जा रहा है। अन्य सभी बोर्ड्स अगले साल तक ग्रेस मार्क्स देने की परंपरा को समाप्त करने के लिए तैयार हो गए हैं। 
 

इस साल अप्रैल में 32 स्कूल एजुकेशन बोर्ड्स ने ग्रेस मार्क्स नहीं देने का फैसला किया था लेकिन एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने इस साल मॉडरेशन पॉलिसी को जारी रखने का निर्देश दिया जिसके चलते CBSE को इस साल मॉडरेशन पॉलिसी की परंपरा को जारी रखना पड़ा। 
 
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