मुंबई. एक्टर संजय दत्त की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। सजा पूरी होने से आठ महीने पहले उन्हें रिहा करने पर सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। सरकार को एक हफ्ते के अंदर एफिडेविट देकर वह मानदंड बताने होंगे, जिनके आधार पर संजय की रिहाई का फैसला हुआ।
– कोर्ट ने पूछा, क्या डीआईजी से सलाह ली गई थी या फिर जेल सुपरिंटेंडेंट ने सीधे ही राज्यपाल को सिफारिश भेज दी थी।
– अफसरों ने कैसे जाना कि संजय का बर्ताव अच्छा है? वह आधे समय तक तो बाहर ही रहे। उनके बर्ताव का आकलन करने का मौका कब मिला?’ शेष |
– संजय को समय से पहले छोड़ने के खिलाफ पुणे के प्रदीप भालेकर ने याचिका दायर की थी।
एक बार 90 और फिर 30 दिन की मिली थी पैरोल
– 1993 के सीरियल ब्लास्ट केस में संजय दत्त को मुंबई की टाडा अदालत ने 31 जुलाई, 2007 को 6 साल कैद की सजा सुनाई थी।
– 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने सजा घटाकर 5 साल कर दी। पुणे की यरवदा जेल से उन्हें तय वक्त से आठ महीने पहले फरवरी 2016 में छोड़ दिया गया। जेल में रहने के दौरान संजय दत्त को 2013 दिसंबर में 90 दिनों की तथा फिर 30 दिनों की पैरोल दी गई थी।