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पहले ये बताइये राम के बाद अयोध्या में क्या हुआ था, फिर करेंगे आगे की बात…

रामायण का बाल कांड, सीता हरण कांड आदि तो बहुत लोकप्रिय हैं, लेकिन रामायण का अंत लोग सीता के पृथ्वी में विलीन होने से मानते हैं. विष्णु का सातवां अवतार यानी श्री राम मानव रूप में थे और इसीलिए उनका देह त्यागना भी जरूरी था. तो जब राम ने देह त्यागी तो कौन बना अयोध्या का राजा?

श्री राम के दो पुत्र थे लव और कुश. जहां लव या लोह ने एक नए राज्य की स्थामना की जो कहीं उत्तर पूर्व पंजाब में है (कुछ लोग लाहौर को भी इससे जोड़ते हैं.) वहीं कुश ने कोसला राज्य (जिसे अयोध्या से बनाया गया था.) में राज किया. कुश राम जितने पराक्रमी राजा नहीं थे और असुर दुर्जया से युद्ध में ही उन्होंने मृत्यु प्राप्त की थी. एक Quora पोस्ट में रघुकुल के अंत तक सभी राजाओं का वर्णन है.

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कुश के बाद राज्य उनके और नाग कन्या कुमुदवती के पुत्र अतिथी के हाथों में चला गया जो एक शूरवीर थे. उनके बाद उनके पुत्र निशध ने राज्य को संभाला. उसके बाद नल जो निशध के पुत्र थे वो राजा बने. नल के बाद नभ ने ये जिम्मा संभाला. तब तक राज्य उत्तर कौशल बन चुका था. नभ के बाद पुण्डरीक, फिर शेमधानव, देवानीक, अहीनागू, परियात्रा, शिल, नाभी, शिखंड, हरिद्शवा, विशवासा, हिरान्याभा, कौसल्य, ब्रह्महिस्था, पुत्रा, पुष्य, और उसके बाद ध्रुवासंधी ने राज्य संभाला. तब तक राज्य काफी बदल चुका था. ध्रुवासंधी की अकाल मृत्यु के बाद 6 साल का बेटा सुदर्षन गद्दी पर बैठा, उसके बाद अग्निवर्णा दूसरी पीढ़ी का राजा बना. अग्निवर्णा ही वो राजा था जिसके कारण रघुवंश का खात्मा हुआ. अग्निवर्णा हमेशा महिलाओं में व्यस्थ रहता था. अग्निवर्णा बहुत कमजोर राजा था, लेकिन कोई भी अन्य राजा रघुवंशियों से भिड़ना नहीं चाहता था इसीलिए राज्य पर आक्रमण नहीं किया. उसकी मृत्यु बहुत जल्दी हो गई और तब उसकी पत्नी गर्भवती थी. इसी के साथ रघुकुल का अंत हुआ था.

कैसे हुई थी श्री राम की मृत्यु..

इस बात का उत्तर मूल रामायण में मिलता है. वाल्मिकी रामायण का पहला अध्याय मूल रामायण कहलाता है जिसमें श्रीराम के देह छोड़ने की बात कही गई है.

राम, पुराण, रामायण, सीता

पौराणिक कथाओं के अनुसार सीता के पृथ्वी में समा जाने के बाद विष्णु का सातवां अवतार यानी श्री राम का पृथ्वी पर काम पूरा हो गया था. श्री राम पहले ही हनुमान को पाताल भेज चुके थे एक अंगूठी ढूंढने क्योंकि उन्हें पता था कि हनुमान रहेंगे तो वो अपना मानव रूप त्याग नहीं पाएंगे. श्री राम से मिलने के लिए एक साधु का भेष बनाकर यम उनसे मिलने आए थे. वो ये बताने आए थे कि राम को अब बैकुंठ लौटना होगा. उनसे मिलते समय राम ने लक्ष्मण को आदेश दिया कि वो किसी को भी अंदर आने न दें नहीं तो उस इंसान को मृत्यु दंड दिया जाएगा. जब राम और यम अंदर थे तो ऋषि दुर्वासा आए, दुर्वासा ऋषि अपने क्रोध के कारण बहुत प्रसिद्ध थे. लक्ष्मण ने उन्हें रोका तो दुर्वासा ऋषि ने राम को श्राप देने की बात कही. ऐसे में भाई को श्राप न मिले इसके लिए लक्ष्मण ने खुद का बलिदान देने की सोची. लक्ष्मण खुद ही राम के पास चले गए. ऐसे में राम को समझ नहीं आया कि वो लक्ष्मण को कैसे मारें. राम ने लक्ष्मण को देश निकाला दे दिया.

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अपने भाई को निराश कर लक्ष्मण खुद सरयु नदी में जाकर विलीन हो गए और शेषनाग का रूप ले लिए. कहा जाता है कि लक्ष्मण शेषनाग का ही मानव रूप थे. इसके बाद राम ने भी इसी तरह अपनी देह त्याग दी.

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