शाकिब ने तोडा ड्रेसिंग रूम का शीशा: रिपोर्ट

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हाल ही में खत्म हुई निदहास ट्रॉफी में बांग्लादेश की टीम ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया. ट्रॉफी के रोमांचक फाइनल मैच में भारतीय टीम भी बांग्लादेश के खिलाफ आखिरी गेंद तक जाकर ही जीत हासिल कर सकी थी.

इसके अलावा बांग्लादेश ने एक हाई स्कोरिंग मैच में मेजबान श्रीलंका को हराया था. इस मैच में जीत हासिल कर बांग्लादेश ने ट्रॉफी के फाइनल में अपनी जगह बनाई थी.

हालांकि, इस प्रदर्शन के अलावा बांग्लादेशी टीम एक और वजह से सुर्खियों में रही. यह घटना मैदान के बाहर ड्रेसिंग रूम में घटी. बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच ग्रुप स्टेज का आखिरी मैच चल रहा था और जीत के लिए दोनों टीमें जोर लगा रही थीं.

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इसी दौरान मस्तफिजुर रहमान रन आउट हो गए थे. दो गेंदें बाउंसर जाने के बाद बांग्लादेशी टीम को लगा था कि दूसरी गेंद को अंपायर नो-बॉल करार देंगे. हालांकि ऐसा नहीं हुआ. इस दौरान बांग्लादेश के अतिरिक्त खिलाड़ी श्रीलंकाई खिलाड़ी कुशल मेंडिस के साथ बहस में उलझे हुए थे तो बांग्लादेशी कप्तान शाकिब अल हसन सीमारेखा के पास खड़े थे. गुस्साए शाकिब ने अपने खिलाड़ियों से वापस आने को कहा.

बांग्लादेश ने इस मैच को महमूदुल्लाह के छ्क्के के साथ अपने नाम किया था. इस मैच के बाद बांग्लादेशी टीम के ड्रेसिंग रूम का एक शीशे का दरवाजा टूटने की तस्वीरें सामने आई थीं. इसके बाद यह विवाद बढ़ता ही चला गया.

श्रीलंकाई अखबार ‘द आईलैंड’ की रिपोर्ट के मुताबिक मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड ने शीशा तोड़ने वाले शख्स का नाम जानने के लिए श्रीलंका और बांग्लादेश के मैच के बाद कैटरर्स से बात की थी. इस मामले की सीसीटीवी फुटेज से भी साफ नहीं हो पा रहा है कि किसने इस शीशे को तोड़ा था. हालांकि, इस अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक वर्किंग स्टाफ ने इस घटना के पीछे बांग्लादेश के कप्तान शाबिक अल हसन का हाथ बताया है.

बताया गया है कि हसन ने शीशे को जोर से धक्का दिया था, जिससे यह टूट गया. शाकिब पर उनकी मैच फीस का 25 फीसदी जुर्माना लगाया गया और आईसीसी ने उनके खाते में एक डिमेरिट अंक भी जोड़ दिया है. मैदान पर उलझने वाले बांग्लादेशी खिलाड़ी नुरुल हसन ने अपनी गलती के लिए माफी मांगी है और उन पर भी मैच फीस का 25 फीसदी जुर्माना लगाया गया है. उनके खाते में भी एक डिमेरिट अंक गया है.

मैच रेफरी ब्रॉड ने इस घटना पर कहा था, ‘मैं समझता हूं कि यह मैदान पर उपजे तनाव का नतीजा था, लेकिन दो खिलाड़ियों के ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. अगर चौथे अंपायर ने शाकिब और फील्डर्स को नहीं रोका होता और मैदान पर मौजूद अंपायरों ने नुरुल और थिसारा के झगड़े में बीचबचाव नहीं किया होता तो यह काफी बुरी शक्ल अख्तियार कर सकता था.’

 

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