पंजाब नेशनल बैंक के दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी के मामले में फरार चल रहे हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी का दावा है कि उसने अपना व्यापार बढ़ाने के लिए पिछले वर्ष कैरेबियाई देश एंटीगुआ की नागरिकता ली थी. एंटीगुआ की स्थानीय मीडिया की खबरों के अनुसार चोकसी का दावा है कि एंटीगुआ के पासपोर्ट पर 132 देशों में बिना वीजा के यात्रा करने की छूट है.

अखबार ‘डेली ऑब्जर्वर’ की खबर के अनुसार, चोकसी की ओर से उसके वकील डेविड डोरसेट ने बयान जारी कर कहा है कि भारतीय सरकार द्वारा लगाये जा रहे आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है. अखबार में प्रकाशित बयान के अनुसार, हालांकि, मैं कह सकता हूं कि मैंने सिटिजनशिप बाई इंवेस्टमेंट प्रोग्राम के तहत वैध तरीके से एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता के लिए आवेदन किया था. अपने आवेदन के दौरान मैं वह सब कुछ किया जो कानूनी रूप से आवश्यक था. नागरिकता के लिए मेरा आवेदन तय प्रक्रिया के तहत मंजूर हुआ है.

खबर के अनुसार, चोकसी ने नवंबर, 2017 में एंटीगुआ की नागरिकता ली है और 15 जनवरी, 2018 को देशभक्ति की शपथ ली है. बयान के अनुसार, चोकसी इलाज के लिए जनवरी 2018 में अमेरिका में था. चोकसी का कहना है कि उसका आवेदन कैरेबियाई देशों में व्यापार बढ़ाने की मंशा और 130 से ज्यादा देशों की वीजा मुक्त यात्रा से प्रेरित था. चोकसी के बयान के अनुसार, ‘‘इलाज के बाद अब भी मैं स्वास्थ्य लाभ ले रहा हूं.’’

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गौरतलब है कि सीबीआई ने एंटीगुआ के अधिकारियों को पत्र लिखकर भगोड़े हीरा व्यवसायी मेहुल चोकसी के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी है. एजेंसी ने बताया कि 24 जुलाई को सीबीआई की तरफ से एंटीगुआ के अधिकारियों को भेजे गए पत्र में भगोड़े व्यवसायी के खिलाफ इंटरपोल की तरफ से जारी नोटिस का हवाला दिया गया और उसकी आवाजाही, वर्तमान ठिकाने का ब्यौरा मांगा.

इससे पहले 11 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को विशेष अदालत से हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी को भगोड़ा घोषित करने की मांग की. ईडी नीरव मोदी, चोकसी और अन्य के खिलाफ धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत दो मामलों में जांच कर रही है. यह जांच मामले की मुख्य जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की जा रही है.