देश के सबसे हाईटेक कमांडोज को मिली कश्मीर घाटी को आतंक मुक्त करने की जिम्मेदारी

कश्मीर में आतंक के अंत के लिए सरकार और सेना अब एक निर्णायक लड़ाई की तैयारी कर चुके हैं। पिछले कई दिनों से कश्मीर के विभिन्न इलाकों में कई मुठभेड़ में लश्कर, हिजबुल मुजाहिद्दीन और अन्य संगठनों के आतंकियों का खात्मा इसी लड़ाई का हिस्सा है।
दरअसल कश्मीर में आतंक के अंत के लिए सरकार और सेना अब किसी भी तरह की कोताही बरतने की तैयारी में नहीं है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार कश्मीर में सेना को आतंकियों के अंत के लिए तमाम संसाधनों की उपलब्धता देने के इंतजाम केंद्र की ओर से किए गए हैं।
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वहीं कश्मीर में आतंक के प्रभावित इलाकों में सेना के साथ काउंटर इंसरजेंसी ऑपरेशन के लिए देश की विशेष सिक्योरिटी फोर्सेज के स्पेशल कमांडोज के दस्तों को भी तैनात किया गया है। सूत्रों के अनुसार सेना की राष्ट्रीय राइफल्स रेजीमेंट के साथ अब कश्मीर में पैरा स्पेशल फोर्सेज और भारतीय सेना के स्पेशल मरीन फोर्स मारकोस के कमांडोज की तैनाती भी की गई है।
जानकारी के मुताबिक सेना के ऑपरेशन ऑल आउट के तहत उन टॉप कमांडरों का अंत नियत कर दिया गया है जो कश्मीर में आतंक को पालने का काम कर रहे थे। इस 258 आतंकियों की लिस्ट में 120 का अंत हो चुका है। कश्मीर में आतंकियों के मंसूबे टूटने लगे हैं और उन सरपरस्त कमांडरों के भी जो कि कश्मीर में दहशत फैलाकर इसे मुख्यधारा से दूर रखना चाहते थे।
सुरक्षा एजेंसियों ने जिन कमांडोज को कश्मीर में आतंक के खिलाफ विशेष ऑपरेशन के लिए तैनात किया है उनका सबसे पहला लक्ष्य दक्षिण कश्मीर के उन तमाम इलाकों को आतंक मुक्त करना है जो कि पिछले कई सालों से हिजबुल और लश्कर का गढ़ कहे जाते रहे हैं।
पिछले दिनों सेना के द्वारा शोपियां में हजारों जवानों के साथ शुरु किए गए सर्च ऑपरेशन के समय से ही इस धारा में काम किया जाने लगा है। इस क्रम में कश्मीर के शोपियां, पुलवामा, कुलगाम और अनंतनाग जिलों में आतंकियों के हर ठिकाने की तलाश की जा रही है।





