क्या आपको भी नहीं मिल रहा सच्चा प्यार? जानिए कैसे अनगिनत ऑप्शन्स खत्म कर रहे हैं रिश्तों की उम्र

नानी-दादी के जमाने में जहां एक सर्कल में उठने-बैठने वाले लोग एक-दूसरे को रिश्तों के बेहतर ऑप्शन बताते थे और लोग उनमें से चुनाव कर लिए करते थे। अब इसकी जगह डेटिंग ऐप्स ने ली है और इसका दायरा इतना बड़ा है कि ऑप्शंस की भरमार के साथ-साथ लोगों में कंफ्यूजन भी काफी बढ़ गया है।
लोग यह तय नहीं कर पाते कि उनके लिए सबसे बेहतर पार्टनर कौन हो सकता है। ऐसा होने से रिश्तों का लंबे समय तक टिक पाना लगभग नामुकिन-सा लगता है। आखिर ज्यादा विकल्प कैसे दुविधा बढ़ा रहे हैं और इसके क्या नुकसान हो रहे हैं, आइए जानते हैं।
अच्छा मिलने पर भी खुश नहीं होते
कई सारी स्टडीज बताती है कि डेटिंग ऐप्स पर ज्यादा ऑप्शंस भी लोगों को खुशी नहीं देते। अच्छा पार्टनर मिल जाने के बावजूद भी उन्हें पछतावा होता रहता है और वो दूसरे ऑप्शन के बारे में सोचते रहते हैं। लोग उसकी वैल्यू करने की बजाय इस विचार में डूबे रहते हैं कि उन्हें इससे भी बेहतर मिल सकता था।
एक ही रिश्ते में बंधकर रहना मुश्किल होता है
जरूरत से ज्यादा विकल्प होने से लोगों में फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) का भाव आ जाता है। लोग किसी लॉन्ग टर्म रिश्ते में बंध नहीं पाते, क्योंकि उन्हें ऐसा लगता रहता है कि इससे भी बेहतर कोई और उसका इंतजार कर रहा है। इससे सीरियल डेटिंग, अटेंशन में कमी और थोड़ा भी एडजेस्ट न कर पाने की आदत बन जाती है।
इस तरह बचें ऑप्शंस के लुभावने जाल में फंसने से
मॉर्डन डेटिंग को पूरी तरह नकारें नहीं, लेकिन इसके नुकसान से बचते हुए अपने लिए एक सही पार्टनर चुनें।
परफेक्ट मैच मिल जाने के बाद उस पर ही अपना फोकस बनाए रखें, थोड़ा समय दें और इमोशनली जुड़ने की कोशिश करें।
इस माइंडसेट से बाहर निकलें कि मुझे एक परफेक्ट पार्टनर ही चाहिए उससे कम नहीं।
परफेक्शन के मायाजाल के पीछे भागने की बजाय रियल पॉइंट्स पर किसी को परखने की कोशिश करें। यदि ऐसा कोई मिल जाए तो रिश्ते को मजबूत बनाने के बारे में सोचें ना कि किसी अन्य ऑप्शंस के बारे में।





