क्या सच में कलयुग समापन के समय यागंती मंदिर में पत्थर के नंदी जीवित हो उठेंगे?

भगवान शिव की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन शिव पुराण में है। भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से भक्तजनों के सभी दुख और संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है। शास्त्रों में निहित है कि भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। आसान शब्दों में कहें तो भगवान शिव की पूजा करने से मनचाहे वर की प्राप्ति शीघ्र हो जाती है। अतः बड़ी संख्या में भक्तजन अपने आराध्य भगवान शिव की पूजा-उपासना करते हैं। वहीं, तंत्र सीखने वाले साधक भगवान शिव की कठिन साधना करते हैं। सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस अवसर पर देशभर में स्थित शिव मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया जाता है। बड़ी संख्या में शिवभक्त बाबा के दर्शन हेतु देश भर की तीर्थ यात्रा करते हैं। इनमें एक मंदिर आंध्र प्रदेश के नांदयाल जिले में स्थित है। इस मंदिर की प्रसिद्धि दुनियाभर में है। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में स्थित पत्थर से निर्मित नंदी जी की प्रतिमा (Yaganti Temple stone Nandi) का आकार दिन व दिन बढ़ता जा रहा है। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-
कथा (Yaganti Temple Beliefs)
दक्षिण भारत में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर यह कहा जाता है कि ऋषि अगस्त्य श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर के स्थान पर भगवान विष्णु का मंदिर बनाना चाहते थे। इसके लिए प्रतिमा का निर्माण भी कराया गया था। हालांकि, स्थापना से पहले ही प्रतिमा खंडित हो गई। इससे ऋषि अगस्त्य बेहद दुखी हुए। उस समय उन्हें कुछ समझ न आया। इसके बाद उन्होंने भगवान शिव की कठिन तपस्या की। ऋषि अगस्त्य की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिया। दर्शन देने के समय ऋषि अगस्त्य ने पूछा कि आखिर किस वजह से भगवान विष्णु की प्रतिमा खंडित हो गई। तब भगवान शिव ने कहा कि यह स्थान शिवालय हेतु अधिक उपयुक्त है। प्रकृति भी चाहती है कि आप यहां पर शिव मंदिर की स्थापना करें। इस स्थल का आकार और संरचना कैलाश समान है। अतः आप यहां पर शिव मंदिर बनाएं। उस समय ऋषि अगस्त्य ने भगवान शिव से याचना की कि आप दोनों यानी शिव और पार्वती एक ही पत्थर में दर्शन दें। ऋषि अगस्त्य की प्रार्थना को भगवान शिव ने स्वीकार कर लिया।
कहां है मंदिर
श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर आंध्र प्रदेश के नांदयाल जिले में है। इस मंदिर का निर्माण हरिहर बुक्का राय ने करवाया था, जो अकबर के समकालीन थे। श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य की वास्तुकला शैली में हुई है। कुरनूल से नांदयाल जिले की दूरी 100 किलोमीटर है। शिव भक्त कुरनूल से नांदयाल पहुंच सकते हैं।
क्या है धार्मिक महत्व ?
मंदिर में भगवान शिव एवं मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित हैं। साथ ही भगवान शिव की सवारी नंदी जी की भी प्रतिमा विराजमान हैं। नंदी जी की प्रतिमा के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि इनका आकार रोजाना बढ़ रहा है। इसके लिए मंदिर की संरचना में भी फेरबदल की गई है। नंदी जी की प्रतिमा के बारे में पोटुलुरी वीरब्रह्मेंद्र स्वामी वरु ने अपनी रचना कलग्ननम में यह बताया है कि मंदिर में स्थापित नंदी की प्रतिमा का आकार रोजाना बढ़ेगा। वहीं, कलयुग समापन के समय प्रतिमा स्वरूप में अवस्थित नंदी जी जीवित हो उठेंगे।
मंदिर की विशेषता
श्री यागंती उमा महेश्वर मंदिर में एक पुष्करिणी भी है। पुष्करिणी का आशय छोटे तालाब से है। इस तालाब में पानी नंदी के मुख से आता है। इस तालाब में भक्तगण स्नान-ध्यान करते हैं। ऋषि अगस्त्य ने भी पुष्करिणी में स्नान कर भगवान शिव की कठिन तपस्या निकटतम गुफा में की थी। वर्तमान में इसे अगस्त्य गुफा कहा जाता है। इसके साथ ही वेंकटेश्वर गुफा और वीर ब्रह्मम गुफा हैं।





