सिर्फ तीन खुराक में कैंसर छूमंतर, पूरे देश से यहां आते हैं मरीज, एक जिले के 60 लोग हो गए ठीक!

कैंसर एक घातक बीमारी है, जिसका इलाज कठिन होने के साथ-साथ महंगा भी है. लेकिन, बुंदेलखंड में इस घातक बीमारी का चुटकियों में इलाज कर दिया जा रहा है. अब इसे आप अंधविश्ववास समझें या मान्यता, पर बड़ी संख्या में लोगों को इससे लाभ भी हुआ है. 12 साल से हर मंगलवार को यह दवा पिलाई जा रही है, जिसके लिए कई प्रदेशों से हजारों लोग एकत्र होते हैं.

सागर के राजवंस गांव में प्रत्येक मंगलवार को एमपी के अलावा यूपी, छत्तीसगढ़ ,राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात सहित अन्य राज्यों के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. कैंसर मरीजों को दिन में तीन बार औषधि पिलाई जाती है. दावा किया जाता है कि इसके बाद कैंसर जैसी बीमारी से मुक्ति मिल जाएगी. हालांकि, दवा पीने के साथ जिंदगी भर के लिए कुछ चीजों का परहेज भी करना पड़ता है. तभी इसका लाभ मिलता है.

दवा पिलाने का समय
दावा किया गया कि शरीर में कहीं भी कैंसर हो, किसी भी स्टेज पर हो, यह दवा पीने के बाद मरीज को आराम मिलता है. मंगलवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे और शाम को 5 बजे इस दवा को पिलाया जाता है, जो पूरी तरह से मुफ्त है. देश के कोने कोने से हर मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग यहां पर पहुंचते हैं और दवा पीते हैं.

माता ने सपना दिया, जड़ी-बूटी का बताया पता
औषधि पिलाने वाले बाबू पटेल बताते हैं कि उन्हें साल 2012 में सोते समय माता ने सपना दिया था. तब से वह जंगल में जाकर खास तरह की जड़ी-बूटी लाते हैं. यह जड़ी-बूटी नदी किनारे पाई जाती है. जिसे लाकर मंदिर में रख देते हैं. फिर बीजासेन माता की कृपा से उन्हीं का नाम लेकर घोलकर मरीजों को पिलाते हैं. दावा किया कि कोई भी कैंसर हो, किसी स्टेज पर हो, हर मरीज को यहां से आराम लगता है. बस दवा पीने के बाद शराब और मांसाहार हमेशा के लिए छोड़ना पड़ता है. अब भारत के हर राज्य से लगभग लोग आते हैं, जिन्हें आराम मिल रहा है.

एक ही जिले के 60 लोगों को कैंसर से मिली राहत
सिवनी मध्य प्रदेश से आए रामकृष्ण सिंह ठाकुर बताते हैं कि 2014 में नागपुर के अस्पताल में मां का इलाज करवा रहे थे. तब हमें इस दवा के बारे में पता नहीं था. वहीं, अस्पताल में बालाघाट की एक महिला थी सफीका खान, उन्हें बच्चेदानी में कैंसर था, जिन्हें हम इस गांव में लेकर आए थे. एक बार दवा पीने से ही आराम मिल गया था. तब से लगातार इस दरबार से हम जुड़े हुए हैं. अब तक 62 लोगों को हम इस दरबार में लेकर आए हैं, जिनमें से 60 लोगों को पूरी तरह से आराम मिला है. मुझे कोई मिलता है तो मैं एक बार यहां जाने की प्रार्थना अवश्य करता हूं, क्योंकि यहां तक आने में केवल किराया ही लगता है.

दवा पीने के बाद के अनुभव
संतोष शांडिल्य बताते हैं कि उनके भाई को गले में कैंसर है, 6 महीने से नागपुर चिखली में इलाज चल रहा है. एक हफ्ते से वह केवल तरल पदार्थ ही नली के माध्यम से ले पा रहे हैं. लेकिन, एक बार यहां दवा पीने के बाद उन्होंने दो अमरूद और एक रोटी खाई है. एक बार की खुराक में ही आराम दिख रहा है. सागर खिमलासा से आई महिला सीमा विश्वकर्मा बताती हैं कि उनके पैर में कैंसर है. 2 साल से अलग-अलग जगह का इलाज करवा रही हैं, हाथ-पैर कांपते हैं, खाना भी अच्छे से नहीं खा पाती थी, लेकिन यहां की दवा के बाद अच्छा महसूस कर रही हैं. झांसी से आई लक्ष्मी कुमार ने बताया कि उनके गांव के एक बुजुर्ग दवा पीने आए थे. उन्हें आराम मिला है. अब वह भी अपने चाचा को लेकर यहां आई हैं. तीन बार की दवा पिलाएंगे, फिर देखते हैं कितना आराम मिल पा रहा है.

ऐसे पहुंचें दवा पीने रजवांस
सागर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर रहली तहसील और नगर पालिका है. यहां से करीब 12 किलोमीटर दूर जबलपुर रोड पर रजवांस गांव हैं. यहां से करीब 1 किलोमीटर अंदर जाने पर बिजासन माता का मंदिर है. इसी मंदिर परिसर में मंगलवार को दवा का सेवन कराया जाता है.

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