चीन ने इस्तेमाल की 27 साल पुरानी तकनीक, बना डाले तिब्बती बकरों के क्लोन!

अचीन ने एक बार फिर एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है. हाल ही में चीन ने दावा किया है कि उसने पहली बार तिब्बत की बकरियों को क्लोन करने में सफलता पाई है और इसके लिए उसी तकनीक का उपयोग किया गया है जिसे दुनिया की पहली क्लोन की गई भेड़ के लिए इस्तेमाल किया गया था. इस तकनीक से चीन पहले ही बंदर की क्लोनिंग भी कर चुका है.
वैज्ञानिकों ने सोमेटिक सेल क्लोनिंग तकनीक का उपयोग किया जिसें एक वयस्क कोशिका के केंद्रक को नई अंडे वाली कोशिका में स्थानांतरित किया गया. इसके बाद इस अंडे को एक सेरोगेट मां के गर्भ में डाला गया जिसने ऐसे बकरी के बच्चे को जन्म दिया जिसमें उसका कोई डीएनए नहीं था.
चीन के सरकारी न्यूज चैनल चाइना सेंट्रल टेलिविजन से जारी एक वीडियो के मुताबिक पहला बच्चा 7.4 पाउंड का था और स्वस्थ है लोकिन दूसरी बकरी के बारे में किसी तरह का कोई जिक्र नहीं किया गया. वे एक बड़े नर बकरी से क्लोन किए गए थे जिन्हें प्रजनन के लिए चुना गया था. चीनी वैज्ञानिक बकरियों की जनसंख्या में से खास तरह के जेनेटिक पदार्थों की संरक्षित कर रहे हैं जो कि बकरी पालने वालों के लिए एक कठिन काम है.
इसी के जरिए पूरी की पूरी जेनेटिक जानकारी को ही क्लोनिंग कर कॉपी की जा सकती है. इसका मकसद अनुवांशिकी संसाधनों की बढ़ाना और अच्छे से उपयोग कर पाना है जिससे स्थानीय किसानों की आय बढ़े और स्थानीय पशुपालन उद्योग का विकास हो सके. टीम ने ऐसे बकरों का क्लोन बनाया है जो भारी मात्रा में ऊन पैदा करते हैं.
इस प्रयोग का मकसद ऐसे नर बकरे बनाना है जो सबसे अच्छा ऊन पैदा करते हैं. इस उपलब्धि के बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं दी गई लेकिन हां जिस जानवर से सोमेटिक कोशिका बनाई गई उसकी जानकारी जरूर सार्वजनिक कर दी गई है. इसी तकनीक ने स्कॉटलैंड में डॉली नाम की भेड़ को क्लोनिंग से बनाया गया था. इस तकनीक के बारे में बताय जाता है कि लगती बहुत आसान है, पर इसे अमल में लाना बहुत मुश्किल है.





