ये खूबसूरत झीलों से सजा शहर परियों की नगरी जैसा लगता है

उदयपुर देश के रोमांटिक शहरों में से एक है। यहां-वहां पानी से लबालब झीलें गर्मियों में भी ठंडक का अहसास कराती हैं। सड़कों पर ट्रैफिक और भीड़-भाड़ न के बराबर है, इसलिए ज्यादा तपिश महसूस नहीं होती।

मेवाड़ के सिसोदिया राजपूतों ने 1567 में चित्तौड़गढ़ के अस्त होने के बाद उदयपुर आकर परियों-सा खूबसूरत शहर बसाया था।
इतिहास बताता है कि राणा उदय सिंह ने 16वीं सदी में उदयपुर की खोज की थी और बीचोंबीच गैरकुदरती पिछौला झील का विस्तार भी किया। आज उदयपुर में महल, हवेली, मन्दिर, बाग और म्यूजियम की भरमार है। साथ ही हैं हर ओर झीलें ही झीलें-जन्नत के बेइतहां नजारे!
फतेह सागर के बगल में सहेलियों की बाड़ी नाम का सुन्दर बाग है। हरियाली और झर-झर बहते फव्वारों की ठंडक टूरिस्ट्स को लुभाती है। बताते हैं कि इसे महाराणा संग्राम सिंह (द्वितीय) ने 1710 से 1734 के बीच राज परिवार की महिलाओं के सैरगाह के लिए बनवाया था। इसीलिए नाम सहेलियों की बाड़ी रखा गया।
यह देश के मशहूर बागों में शुमार है। बाग के कई भाग हैं। नाम हैं- सावन भादो, हाथी फव्वारे, रासलीला, बिन बादल बरसात वगैरह। असल में, शुरुआती दौर में फतेह सागर के करीब छोटे-छोटे कई बगीचे थे। इन्हें महाराणा फतेह सिंह ने सहेलियों की बाड़ी में मिलाकर, भव्य स्वरूप प्रदान किया। खूबसूरती इस कदर है कि बॉलीवुड की कई फिल्मों में रूपहले पर्दे पर छाया है।





