मदन कौशिक का सियासी कौशल और विभाग के कामकाज को परखा जाएगा कसौटी पर

 उत्तराखंड के 84 निकायों में होने जा रहे चुनावों में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में सरकार के समक्ष तो अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है ही, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का सियासी कौशल और पिछले डेढ़ साल के दौरान उनके विभाग के कामकाज को भी जनमत की कसौटी पर परखा जाएगा। सरकार में सर्वाधिक सक्रिय और मुख्यमंत्री के नजदीकी माने जाने वाले कौशिक के लिए निकाय चुनाव व्यक्तिगत तौर पर भी प्रतिष्ठा का सवाल हैं।मदन कौशिक का सियासी कौशल और विभाग के कामकाज को परखा जामदन कौशिक का सियासी कौशल और विभाग के कामकाज को परखा जाएगा कसौटी परएगा कसौटी पर

यूं तो वरिष्ठता के लिहाज से मदन कौशिक से ऊपर मंत्रिमंडल में कुछ अन्य सदस्य हैं, लेकिन सक्रियता के लिहाज से उन्हें अव्वल माना जाता है। इसीलिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उन्हें पद संभालते ही सरकार के प्रवक्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी। यानी, एक तरह से कौशिक की भूमिका पिछले डेढ़ साल के दौरान सरकार के संकटमोचक की रही है। किसी भी चुनौती के वक्त कौशिक ही सरकार का पक्ष लेकर आगे आते रहे हैं। अब जबकि विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार भाजपा और कांग्रेस जनता के सामने जा रहे हैं, एक बार फिर कौशिक के कौशल की अग्निपरीक्षा होने जा रही है।

दरअसल, मदन कौशिक के पास ही शहरी विकास मंत्रालय है और निकाय चुनावों में उनके मंत्रालय की ओर से किए गए कार्यों को ही मुख्यतया कसौटी पर परखा जाना है। हालांकि, निकायों को वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर पूर्व में बजट दिया गया, लेकिन बड़े पैमाने पर निकायों में ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किए जाने के बाद वहां नगरीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में वह पहल नहीं हो पाई, जिसकी दरकार है। इस लिहाज से जिन सात नगर निगमों में चुनाव हो रहा है, वहां यह बात खास मायने रखती है। ऐसी ही स्थिति उन नगर पालिका परिषदों व नगर पंचायतों की भी है, जहां बड़ी संख्या में गांवों को शहरों का हिस्सा बनाया गया है। जाहिर है कि गांवों के शहरों का हिस्सा बनने के बाद उनकी अपेक्षाएं अधिक हैं। ऐसे में वहां संतुलन साधने की बड़ी चुनौती भी कैबिनेट मंत्री कौशिक के कंधों पर ही रहने वाली है।

शहरी विकास की मुख्य योजनाएं

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (सबके लिए आवास)।
  • सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट।
  • सीवेज व पेयजल संबंधी योजनाएं (एडीबी पोषित व अमृत योजना)।
  • राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन।
  • जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के गठन के बाद क्रियान्वयन संबंधी कार्य।
  • जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों में मास्टर प्लान लागू करना।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 के बाद स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 की तैयारियां।
  • रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के अंतर्गत प्रभावी नियंत्रण व निगरानी तंत्र बनाना।
  • गैरसैंण में इंटीग्रेटेड स्मार्ट सिटी बनाने की योजना।
  • विभिन्न नगरों में लैंड पूलिंग योजना के तहत लैंड बैंक की जरूरत पूरी करना।
  • प्रमुख शहरों में लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम, पॉड टैक्सी व रोपवे जैसी परियोजनाओं पर काम करना।
  • दून में स्मार्ट सिटी परियोजना की मंद पड़ी गति को तेज करना।

 जनता सरकार के कामकाज से संतुष्ट: कौशिक

शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि जनता राज्य सरकार के अब तक के कार्यकाल से संतुष्ट है। इसलिए नगर निकाय चुनाव में भाजपा को पूरे राज्य में एकतरफा जनादेश मिलेगा। शहरों की खूबसूरती के लिए मुख्य मार्गों को अतिक्रमणमुक्त करने की पहल की गई और जनता ने भी इसे सराहा है। कांग्रेस ने विरोध किया, लेकिन जनता सच्चाई जानती है। सरकार ने पिछले डेढ़ साल में शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए कई योजनाएं आरंभ की हैं। केंद्र की योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है। सरकार की अब तक की उपलब्धियां महत्वपूर्ण रही हैं।

  • सभी निकायों के बजट में तीन गुना वृद्धि।
  • शहरों के विकास को एडीबी से 1700 करोड़ रुपये की व्यवस्था।
  • राज्य के छह शहरों को अमृत सिटी योजना में शामिल कराया।
  • देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, रुद्रपुर, कोटद्वार में ङ्क्षरग रोड या बायपास निर्माण की केंद्र से मंजूरी, काम आरंभ।
  • स्वच्छता में राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग में सुधार।
  • अगले तीन साल में सभी शहरों में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट का कार्य। 
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