J&K: अलगाववादियों के बंद और आतंकियों की धमकी के बाद भी लोगों ने किया मतदान

अलगाववादियों के बंद व बहिष्कार, आतंकियों की धमकी और नेकां-पीडीपी के बहिष्कार के बाद भी कश्मीर घाटी के मतदाताओं ने आतंक को आईना दिखाया। आशंकाओं के विपरीत नगर निकाय चुनाव में मतदान करने के लिए लोग सोमवार को घर से बाहर निकले। यह जरूर है कि मतदान का प्रतिशत कम रहा। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर पूरी घाटी में छह स्थानों पर शांतिपूर्ण मतदान हुए।
उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में 30 प्रतिशत से अधिक वोट पड़े। आतंक के गढ़ दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले में भी 07 प्रतिशत से अधिक लोगों ने वोट डाले। निकाय चुनाव के पहले चरण में घाटी में अनंतनाग, बडगाम, बांदीपोरा, बारामुला, कुपवाड़ा, व श्रीनगर में वोट डाले गए।
उत्तरी कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा में 32 फीसदी से अधिक मत पड़े। केवल बांदीपोरा में मतदान पांच फीसदी से कम यानी 3.4 प्रतिशत रहा। निकाय चुनाव से ठीक पहले दो नेकां कार्यकर्ताओं की हत्या और अलगाववादियों के बंद के बाद भी श्रीनगर नगर निगम के तीन वार्डों के लिए लोग नुमाइंदा चुनने आगे आए। यहां आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने चुनाव से हटने की धमकी भरे पोस्टर चस्पा किए थे। श्रीनगर में चारो ओर पसरे सन्नाटे व भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच धीमी गति से लोग मतदान करने बाहर निकले।
पहले भी हुए हैं कम मतदान
घाटी में पहले भी विधानसभा चुनावों में कम मतदान रिकार्ड किया गया है। वर्ष 2002 में श्रीनगर जिले के छह विधानसभा सीटों पर पांच प्रतिशत से भी कम मत पड़े थे। इनमें अमीराकदल में 3.06, हब्बाकदल में 3.21, बटमालू में चार, खान्यार में 4.22, ईदगाम में 4.75 व जदिबल में 4.78 फीसदी मतदान हुआ था।





