40 करोड़ मजदूरों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा कवर, जल्द सकती है शुरुआत

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केंद्र सरकार असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करीब 40 करोड़ मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा का कवर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को इस क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की पहचान संख्या बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।

उम्मीद की जा रही है कि आगामी 17 सितंबर को इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर सकते हैं। केंद्र की इस योजना को आने वाले आम चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने या उन्हें स्वास्थ्य सेवा या कोई अन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन इसकी एक जगह जानकारी नहीं है।

इसका मूल कारण इन योजनाओं का कई मंत्रालयों से जुड़ा होना है। वहीं, कुछ योजनाओं के लिए कोष तो केंद्र सरकार उपलब्ध करा रही है, लेकिन उसे लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों की है।

आधार से जुड़ी होगी पहचान संख्या

इन सब वजहों से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि किस लाभार्थी को किस योजना का फायदा मिल पा रहा है और किसे नहीं। इसलिए सरकार असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की पहचान संख्या (यूडब्ल्यूआईएन) बनाएगी, जो आधार संख्या से जुड़ी होगी। इसके लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया की हरी झंडी मिल गई है। इसके जरिये सामाजिक सुरक्षा पेंशन, स्वास्थ्य लाभ, महिलाओं के लिए प्रसूति लाभ आदि की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
वित्त मंत्रालय से मंजूरी मिली 
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, इस योजना को हरी झंडी मिल चुकी है। देश के 40 करोड़ लोगों को आधार संख्या पर आधारित पहचान संख्या उपलब्ध कराने के लिए 402 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत हो चुका है। यही नहीं, इस योजना को विश्व बैंक की तरफ से तकनीकी सहायता भी मिलेगी, जो नॉन लेंडिंग टेक्निकल असिस्टेंस स्कीम के तहत उपलब्ध होगी।पेंशन
देने में कारगर होगी योजना    
अधिकारी के मुताबिक, असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उम्रदराज होने पर उनके पास जीवन-यापन का कोई साधन नहीं बचता। इसलिए ऐसे लोगों को पेंशन उपलब्ध कराने में यह योजना कारगर हो सकती है। साथ ही, ऐसे मजदूरों को स्वास्थ्य सेवा तथा कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत मिल रही कुछ अन्य सुविधाएं देने पर भी विचार हो रहा है। उनके मुताबिक, यदि जरूरत पड़ी तो सरकार की कुछ अन्य योजनाओं का लाभ भी इसी के तहत दिया जा सकता है। सभी मजदूरों को यूडब्लयूआईएन मिलने के बाद उनके लिए कुछ और योजनाओं की भी घोषणा हो सकती है।

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