मोदी सरकार कर सकती है आम बजट में ये अहम बदलाव

दिल्ली. वित्त मंत्रालय अरुण जेटली के 1 फरवरी को आम बजट 2017-18 संसद में पेश करने वाले है . पहले ही आम बजट पर कई विवाद चल रहे थे और ऐसे में महत्वपूर्ण परिवर्तन की घोषणा की भी आशंका हो रही है. दरअसल, सरकारी खर्च के योजनागत और गैर-योजनागत वर्गीकरण को खत्म करने पर विचार कर रही है. बीते 58 साल से चली आ रही यह परिपाटी अब इतिहास बन जाएगी. इसकी जगह बजट दस्तावेजों में सरकारी व्यय का वर्गीकरण राजस्व और पूंजीगत व्यय के रूप में ही किया जाएगा.
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अधिकारियों के मुताबिक पिछले 2016-17 वर्ष की गयी घोषणा के आधार पर आम बजट 2017-18 से योजनागत और गैर-योजनागत व्यय के अंतर को खत्म करने की तैयारी पूरी हो चुकी है अधिकारियों का कहना है कि सरकार के इस कदम से बजटीय प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और अब आसानी से ही यह पता चल सकेगा कि सरकारी धन का इस्तेमाल विकास कार्यो के लिए कितना हो रहा है.
1950 में आम बजट में सरकारी खर्च का योजनागत और गैर-योजनागत व्यय के रूप में वर्गीकरण का विचार नियोजित विकास की शुरुआत से ही किया गया था. लेकिन यह 1959-60 में व्यवहार में आया. उस समय वित्त मंत्री मोरारजी देसाई थे. देसाई ने 28 फरवरी 1959 को आम बजट पेश करते हुए सार्वजनिक व्यय का वर्गीकरण योजनागत और गैर-योजनागत के रूप में करने का ऐलान किया. उन्हांेने दलील दी कि ऐसा होने पर योजनाओं पर पैसा प्रभावी ढंग से खर्च हो सकेगा.





