राजस्थान सरकार आदिवासी और अनुसूचित जाति के बच्चों को दिलाएगी कोचिंग…

राजस्थान सरकार प्रदेश के आदिवासी क्षेत्र और अनुसूचित जाति के बच्चों को उच्चस्तरीय कोचिंग सुविधा उपलब्धक कराएगी। इसके लिए आदिवासी जिलों में आधुनिक कोचिंग सेंटर खोले जाएंगे और अनुसूचित जाति के बच्चों को कोटा के अच्छे कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई कराई जाएगी।

अनुसूचित जनजाति यानी आदिवासी और अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए यह घोषणाएं सरकार की ओर विधानसभा में की गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा पेश बजट के बाद अब सामाजिक न्याय व अधिकारित विभाग के मंत्री भंवरलाल मेघवाल और अनुसूचित जनजाति विकास मंत्री अर्जुन बामणिया ने भी इन वर्गों के लिए अहम घोषणाएं की है। मंत्रियो द्वारा घोषित कार्यक्रमों में सबसे बडा काम आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चों को उच्च और तकनीकी शिक्षा से जोड़ने का है।

जनजाति क्षेत्रीय विकास राज्य मंत्री अर्जुनलाल बामणिया ने बताया कि सरकार ने पहली बार उदयपुर व बांसवाड़ा में आईआईटी व नीट की परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों की कार्यशालाएं आयोजित की थी। इन कार्यशालाओं में दिए मार्गदर्शन के कारण इस वर्ष आदिवासी क्षेत्र के 39 छात्रों ने कोटा और 100 छात्र-छात्राओं ने उदयपुर के कोचिंग संस्थानों में प्रवेश लिया। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए इसी सत्र से मॉडल पब्लिक स्कूल, ढीकली (उदयपुर) व सुरपुर (डूंगरपुर) में सेंटर फॉर एक्सीलेंस प्रारंभ किया जा रहा है।

इन दोनों विद्यालयों में कक्षा 11 में विज्ञान वर्ग में परीक्षा के साथ नीट व आईआईटी की तैयारी करने के लिए विशेष कोचिंग कराई जाएगी। इसके साथ ही आदिवसी वर्ग के छात्र-छात्राओं को विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए सागवाड़ा एवं उदयपुर में दस करोड की लागत से अत्याधुनिक कॅरियर काउंसलिंग सेंटर शुरू किया जा रहा है। यहां उत्कृष्ट कोचिंग सेंट खोलने के साथ ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी व व्यक्तित्व विकास की काउंसलिंग भी की जाएगी। प्रत्येक सेंटर पर 100 विद्यार्थियों के लिए ई-कक्षा कक्ष, ट्रेनिंग सेंटर, केरियर काउंसलिंग, कंप्यूटर लाईब्रेरी, डायनिंग हॉल व आवास सुविधा उपलब्ध होगी।

इसी तरह अनुसूचित जाति के बच्चों को भी सरकार की ओर से कोचिंग दिलाइ जाएगी। सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री भंवरलाल मेघवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री निःशुल्क कोचिंग योजना के तहत कोटा और जयपुर में अनुसूचित जाति वर्ग के 500-500 बच्चों को जेईई मैन्स व नीट, आईआईटी, आईआईएम.(प्रबंधन) तथा क्लैट की कोचिंग कराई जाएगी। इसके लिए छह लाख तथा आदिवासी क्षेत्र से बाहर रहने वाले अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए पांच लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।

यह भी की गईं घोषणाएं

– आदिवासी क्षेत्रों में अधिक उपज देने वाले बीजों के प्रदर्शन, स्टोरेज बीन, सिंचाई के लिए पाइप लाइन व पॉली ग्रीन हाउस 90 प्रतिशत अनुदान। इससे एक लाख 65 हजार 905 किसान लाभांवित होंगे।

– सोलर आधारित 50 नवीन जलोत्थान सिंचाई योजनाएं स्थापित की जाएगी।

– पांच कौशल विकास केंद्रों का निर्माण होगा।

– राजसमंद जिले के मचिंद में राणा पूंजा स्मारक स्थल को इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

– भारत रत्न बाबा साहेब अंबेडकर के नाम पर दिये जाने वाले पुरस्कार अब जिलास्तर पर भी दिए जाएंगे।

– जोधपुर में 91 लाख रुपये की लागत से बाल परामर्श व कौशल विकास केंद्र की स्थापना की जाएगी।

– बच्चों में नशे प्रवृति को रोकने और उन्हें नशे की आदत से बाहर निकालने के लिए जयपुर, जोधपुर व कोटा संभाग मुख्यालयों पर समेकित बाल पुनर्वास केंद्रों की स्थापना

– अनाथ बच्चों के शारीरिक, बौद्धिक, भावनात्मक, शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक उत्थान व समुचित विकास के लिए विशेष नीति बनेगी।

– पेंशन आवेदन के 90 दिन में ही आवेदक को पेंशन मिल सकेगी। सामाजिक सुरक्षा पेंशन का आवेदन करने के 45 दिन तक पेंशन आवेदन का निस्तारण नहीं करने पर 45 दिन में स्वतः पेंशन स्वीकृत मानी जाएगी व आगामी 45 दिन में इसका भुगतान कर दिया जाएगा।

– अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियों को अब छात्रावासों में न्यूनतम 40 फीसद अंकों पर भी प्रवेश मिल सकेगा। विद्यार्थी के परिवार की आय सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दी गई है।

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