महिलाएं हनुमान जी को चोला क्यों नहीं चढ़ाती?

हिंदू धर्म में हनुमान जी को कलयुग का देवता कहा जाता है, जिनकी पूजा करने से भक्त के संपूर्ण दुखों का नाश होता है। भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार हनुमान जी ने भगवान श्रीराम के कार्यों को सिद्ध करने के लिए अवतार लिया था।

देशभर में उनके कई छोटे और बड़े मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी इच्छा पूरी होने पर उन्हें लड्डू का भोग, फल, अनाज और चोला अर्पण करते हैं। लेकिन इनकी पूजा करते समय महिलाओं को क्यों हनुमान जी को छूने या चोला चढ़ाने से मना किया जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक मत क्या है?

महिलाएं हनुमान जी को चोला क्यों नहीं चढ़ाती?
हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोगों का मानना है कि, हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं, उन्हें सभी स्त्रियों में अपनी माताएं नजर आती हैं, जिस वजह से किसी भी स्त्री को उनपर चोला चढ़ाने या पैर छूने की मनाही होती है।

मान्यताओं के मुताबिक, हनुमान जी ने आजीवन बाल ब्रह्मचारी व्रत पालन करने का संकल्प लिया है।

रामायणकाल से जुड़ा है किस्सा
रामायणकाल से ही हनुमान जी माता सीता के आदेशों का मानते हैं और उनके सामने हमेशा झुकते हैं, जिस कारण उन्हें ये बिल्कुल भी पसंद नहीं है कि, कोई भी महिलाएं उनके सामने झुकें या पैरों को छूएं, बल्कि हनुमान जी स्त्रियों के सम्मुख खुद झुकते हैं।

वाल्मीकि रामायण और पराशर संहिता जैसे पवित्र धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट रूप से हनुमान जी के बाल ब्रह्मचारी होने का उल्लेख मिलता है। हालांकि कई लोगों को यह अपवाद लग सकता है, क्योंकि हनुमान जी विवाहित होकर कैसे बाल ब्रह्मचारी हो सकते हैं?

पराशर संहिता के मुताबिक, हनुमान जी ने सूर्य देव से शिक्षा प्राप्त करने के लिए उनकी पुत्री सुवर्चला से विवाह किया था, लेकिन विवाह के पश्चात भी वे एक दृढ़ ब्रह्मचारी ही रहें।

क्षेत्रीय मान्यताओं में अंतर
पुरुषों की ही तरह महिलाएं भी हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर हनुमान चालीसा का पाठ कर सकती हैं, लेकिन आमतौर पर उन्हें स्पर्श या चोला चढ़ाने की मनाही होती है।

हालांकि इस पर क्षेत्रीय मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं, क्योंकि आंध्र प्रदेश में हनुमान जी और मां सुवर्चला देवी का मंदिर है, जहां स्थानीय लोग उनके विवाह के प्रसंग पर अटूट आस्था रखते हैं।

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