ज्येष्ठ माह में बन रहा 4 एकादशी का दुर्लभ संयोग

वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास की वजह से 2 ज्येष्ठ माह होंगे। सनातन धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है। अधिक मास की शुरुआत 17 मई से होगी।
2 ज्येष्ठ माह होने की वजह से 4 एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत को करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा से बिगड़े काम पूरे होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ माह में कब कौन-सी एकादशी का व्रत किया जाएगा।
ज्येष्ठ माह कब कौन-सी एकादशी है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह में अपरा एकादशी (Apra Ekadashi 2026), पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी और निर्जला एकादशी व्रत किया जाएगा।
अपरा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
इस बार अपरा एकादशी व्रत 13 मई को किया जाएगा।
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 12 मई को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 13 मई को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर
व्रत पारण का समय- सुबह 05 बजकर 31 मिनट से 08 बजकर 14 मिनट तक
पद्मिनी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, पद्मिनी एकादशी 27 मई (Padmini Ekadashi 2026) को मनाई जाएगी।
पद्मिनी एकादशी एकादशी तिथि की शुरुआत- 26 मई को सुबह 05 बजकर 10 मिनट पर
पद्मिनी एकादशी एकादशी तिथि का समापन- 27 मई को सुबह 06 बजकर 21 मिनट पर
व्रत पारण का समय- सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 07 बजकर 56 मिनट तक
परमा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
इस बार परमा एकादशी 11 (Parma Ekadashi 2026) जून को मनाई जाएगी।
अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर
अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 11 जून रात 10 बजकर 36 मिनट पर
व्रत पारण का समय- सुबह 05 बजकर 23 मिनट से 08 बजकर 10 मिनट पर
निर्जला एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
इस बार निर्जला एकादशी व्रत 25 जून (Nirjala Ekadashi 2026) को किया जाएगा।
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 24 जून को शाम 06 बजकर 12 मिनट पर
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 25 जून को रात 08 बजकर 09 मिनट पर
व्रत पारण का समय- 26 जून को सुबह 05 बजकर 25 मिनट से 08 बजकर 13 मिनट तक
एकदाशी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अपरा एकादशी व्रत करने से साधक को धन और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही पापों से छुटकारा मिलता है।
पद्मिनी एकादशी व्रत करने से तीर्थों की यात्रा के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
परमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी की पूजा और व्रत करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। जीवन में समृद्धि का वास होता है।
निर्जला एकादशी व्रत को अधिक कठिन माना जाता है। इस व्रत को निर्जला किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से साल की सभी एकादशियों के बराबर का पुण्य मिल जाता है।





