जनता की माया, मायावती को बना रही सीएम

flags-768x364 (1)लखनऊ. उत्तर प्रदेश में राजनीति अभी से आंज पकड़ने लगी है। सभी पार्टियां अपने आप को आने वाले चुनाव में नंबर वन बताने से नहीं चूक रही हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में अगर अभी चुनाव कराए जाएं तो बसपा 185 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आ रही है।। हालांकि, यह 403 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत से 17 सीट कम है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं। ये अखिलेश सरकार के चार साल पूरे होने के मौके पर कराए गए निजी सर्वे एजेंसियों के आंकड़ें है।इन आंकड़ों व राजनीति पर टैट न्यूज ने जब लखनऊ व आस-पास की जनता से बाच-चीत की तो इस बार चुनाव पर लोगों का अलग नजरिया सामने आया। ज्यादातर लोगों ने हमें बताया की इस बार बेकार के मुद्दे राजनीतिक पार्टियों के काम नहीं आने वाले हैं फिर चाहे वो भाजपा का पुराना व ताकतवर मुद्दा राम मंदिर का ही मुद्दा क्यों न हो। इस बार ज्यादातर लोगों को पहली पसंद मायावती बनी हुईं हैं वहीं सीएम की दौड़ में अखिलेस दूसरे नंबर पर है। भाजपा के सीएम चेहरे को लेकर लोग थोड़े कन्फ्यूज नजर आ रहे हैं जिसका मुख्य कारण भाजपा की बिना सीएम प्रोजेक्ट किए चुनाव लड़ने की नीति है।
अगर आज की  परिस्थितियों में व चुनाव के समय की परिस्थितियों में कोई खास परिवर्तन नहीं आया तो यूपी की सीएम मायावती होगी वहीं दूसरे नंबर की पार्टी भाजपा व तीसरे नेंबर पर सपा को देखा जा रहा है।

दूसरे पर भाजपा और तीसरे पर सपा
सर्वेक्षण के अनुसार, आज चुनाव हों तो भाजपा के दूसरे स्थान पर आने का अनुमान है और सत्तारूढ़ सपा तीसरे स्थान पर खिसक सकती है। रायशुमारी के मुताबिक, 2012 में पूर्ण बहुमत पाने वाली सपा इस बार 80 सीटों पर सिमट सकती है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी को पांच सीटें ही मिली थीं। जबकि आम चुनाव में 80 में 73 सीटें पाने वाली भाजपा अभी चुनाव हो तों 120 विधानसभा सीटों पर कब्जा कर सकती है।
मुख्यमंत्री के रूप अखिलेशजनता की दूसरी पसंद
कांग्रेस और रालोद पिछले चुनाव में मिली 37 सीटों की जगह 13 पर सिमट सकते हैं। यदि मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद की बात की जाए तो मायावती 31 फीसदी और अखिलेश यादव को 30 फीसदी में कड़ी टक्कर दिख रही है। राजनाथ सिंह को 18, वरूण गांधी को 7, स्मृति ईरानी को 4 और प्रियंका गांधी को 2 फीसदी लोग मुख्यमंत्री के रूप में पसंद कर रहे हैं।
56 फीसदी अखिलेश के काम को मानते हैं अच्छा
सर्वे में 56 फीसदी से ज्यादा लोगों ने अखिलेश सरकार के कामकाज को अच्छा या औसत पाया। जबकि 36 फीसदी ने इसे खराब या बेहद खराब बताया। कानून व्यवस्था में कमी को तो लोग मानते हैं लेकिन उनके द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों को भी स्वीकार्य करते हैं।
काम नहीं आएगा मंदिर मुद्दा
लंबे समय से सत्ता परिवर्तन का केन्द्र माना जाने वाला मंदिर मुद्दा इस बार जनता की नजर में मायने नहीं रखता। सर्वे में 47 फीसदी प्रतिभागियों ने माना कि अयोध्या, मथुरा, काशी में मंदिर जैसे मुद्दों से उन्हें फर्क नहीं पड़ता। यानि मंदिर मुद्दे को भुनाने का प्रयास करने वाले दलों के लिए ये सर्वे एक संकेत है कि वे इस दिषा में समय व्यर्थ न गवाएं।
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