खुदरा महंगाई दर 5 सालों का सबसे निचला स्तर

 खुदरा महंगाई दर 5 सालों के सबसे निचले स्तर पर आ गयी है। वहीं शहरी इलाकों में खाने पीने की चीजों की खुदरा महंगाई दर निगेटिव हो चली है।

सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी के महीने में खुदरा महंगाई दर 3.17 दर्ज की गयी जबकि दिसम्बर में ये दर 3.41 फीसदी थी। खुदरा महंगाई दर में कमी से ब्याज दर घटाने का माहौल बनता है। वैसे खुदरा महंगाई दर में कमी सरकारी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर नही है, क्योकि महंगाई भत्ते का आंकलन इसी आधार पर होता है. महंगाई भत्ते की नई दर पहली जनवरी से तय होनी है और इसके लिए पिछले छह महीने के दौरान की खुदरा महंगाई दर को आधार बनाया जाएगा। सातवे वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद पहली बार महंगाई भत्ते का नए सिरे से आकलन इस महीने के अंत तक हो सकता है।

आंकड़ों के मुताबिक, खाने पीने के सामान की खुदरा महंगाई दर यानी सीएफपीआई जनवरी में 0.53 फीसदी रही जबकि दिसम्बर में 1.37 फीसदी थी। ग्रामीण इलाको में खुदरा महंगाई दर में एक फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गयी जबकि शहरी इलाकों में महंगाई दर बढ़ने के बजाए 0.31 फीसदी की दर से घट गयी।

खुदरा महंगाई दर 5 सालों का सबसे निचला स्तर

खुदरा महंगाई दर में कमी लाने में सबसे बड़ी भूमिका सब्जियों की रही। इनकी महंगगाई दर साढ़े 15 फीसदी से ज्यादा घट गयी वहीं कुछ महीने पहले सरकार के सिरदर्द बने दाल के लिए भी खुदरा महगाई दर निगिटेव गयी। दाल की ज्यादा इलाकों में बुवाई और आयात की वजह से दाल की आवक काफी बढ़ गयी है, जिसके चलते दाम घटे हैं।                        वहीं साग- सब्जियों की बात करें तो आम तौर पर दिसम्बर और जनवरी के महीने मे इनके भाव में नरमी दिख रही है। ये भी मत भूलिए कि इस बार साग-सब्जी की पैदावार बेहतर हुई है।

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बहरहाल, चीनी की मिठास कम ही होती जा रही है, क्योकि चीनी और कनफेक्शनरी से जुड़ी खुदरा महंगाई दर साढ़े 18 फीसद से ज्यादा दर्ज की गयी। चीनी के दाम खुदरा बाजार में एक ही महीने में दो रुपये प्रति किलो बढ़ गए हैं। खुद सरकारी आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में चीनी खुदरा बाजार में 42 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है जबकि जनवरी मे यही भाव 40 रुपपे थे।

खुदरा महंगाई दर में कमी आने से ब्याज दर मे कमी की संभावना तो बनती है। लेकिन रिजर्व बैंक गवर्नर की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति ने पिछले दोनों समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कोई बदलाव नही किया। अब परेशानी ये है कि विश्व बाजार में अनिश्चतिता कायम है और कच्चे तेल के भाव लगातार बढ़ रह हैं। ऐसे में खुदरा महंगाई दर में कमी के बावजूद ब्याज दर में और गिरावट की संभावना कुछ कमजोर सी दिख रही है।

 
 
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