इन्सेंटिव नहीं मिलने पर निसान ने सरकार को भेजा 5,000 करोड़ रुपए का नोटिस

नई दिल्ली.जापान की निसान मोटर ने भारत सरकार को 5,000 करोड़ रुपए का नोटिस भेजा है। यह तमिलनाडु में कंपनी के प्लांट के सिलसिले में है। आरोप है कि समझौते के बावजूद राज्य सरकार ने कंपनी को इन्सेंटिव नहीं दिया। निसान के वकीलों ने जुलाई 2016 में ही प्रधानमंत्री को नोटिस भेजा था। कंपनी इस मामले को ले गई अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में…इन्सेंटिव नहीं मिलने पर निसान ने सरकार को भेजा 5,000 करोड़ रुपए का नोटिस

कंपनी अब इस मामले को अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन में ले गई है। आर्बिट्रेशन में पहली सुनवाई दिसंबर के मध्य में होगी। निसान ने 2,900 करोड़ रुपए इन्सेंटिव और 2,100 करोड़ रुपए की नुकसान भरपाई के साथ ब्याज की भी डिमांड की है। आठ पेज के नोटिस में कहा गया है कि इन्सेंटिव नहीं देने का राज्य सरकार का फैसला मनमाना है। इस वजह से कंपनी को काफी नुकसान हुआ है। इस प्रोजेक्ट के कारण प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 40,000 लोगों को काम मिला है। इस बारे में तमिलनाडु के एक अधिकारी ने कहा कि डिमांड की गई रकम को लेकर कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के बगैर समाधान निकल जाएगा।

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बिजनेस में ‘परेशानी’ के 9 साल

– तमिलनाडु में प्रोजेक्ट के लिए 2008 में निसान और राज्य सरकार में समझौता हुआ। सरकार टैक्स रिफंड समेत कई इन्सेंटिव पर राजी थी।

– निसान ने फ्रांस की रेनॉ के साथ मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया। 7 साल में 6,100 करोड़ रुपए निवेश किए।

– सरकार 2015 में इन्सेंटिव मिलना था, लेकिन नहीं मिला।

– मार्च 2016 में निसान के चेयरमैन कार्लोस घोस्न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। इसके बाद भी भुगतान नहीं।

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