अगर एडम कोच होते तो इतिहास पुरुष नहीं बनते जिक्सन


यह पुर्तगाली कोच लुई नार्टन डि माटोस ही थे, जिन्होंने सात माह पूर्व मणिपुर के इस फुटबॉलर को अपनी योजनाओं में शामिल किया। जिक्सन का माटोस की नजरों में चढ़ने का सबसे बड़ा कारण उनकी लंबाई थी। एडम ने उन्हें अत्यधिक लंबाई के चलते चयनित नहीं किया और माटोस लंबे फुटबॉलर चाहते थे।
माटोस ने जब इंटरनेशनल फुटबॉलर अभिषेक यादव से कहा कि उन्हें लंबा मिडफील्डर चाहिए, तब वो जैक्सन को उनके पास लाए। माटोस ने फौरन उनकी प्रतिभा को पहचान और कोर टीम में जगह दी। जैक्सन का कहना है कि उस दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मिनर्वा औ्रर आई लीग में उनकी टीम चेन्नई सिटी एफसी में मिडफील्ड की बारीकियां सीखींए जो उनके चयन में काम आईं।
वह साफ करते हैं कि उनका नाम जैक्सन नहीं बल्कि जिक्सन है। गोल करने पर उन्हें खुशी तो है, लेकिन हार ने इसी खुशी को खत्म कर दिया है। इससे वह निराश हैं।
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मां बेचती है सब्जी पिता को हुआ ब्रेन स्ट्रोक
जिक्सन के पिता उन्हें और टीम के कप्तान अमरजीत को बचपन में फुटबॉल सिखाते थे। पिता को अचानक ब्रेन स्ट्रोक पड़ गया, जिससे परिवार की हालत खराब हो गई। उनकी मां को 25 किलोमीटर दूर जाकर सब्जी तक बेचनी पड़ी। जिक्सन बताते हैं कि कल के मैच के बाद मां से बात कर वह भावुक हो गए।





