हाईकोर्ट ने पूछा, क्या केवल तबादले से रुक सकती है घूसखोरी ?

मुंबई.बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को ट्रैफिक पुलिस विभाग से सवाल किया कि क्या सिर्फ पुलिसकर्मियों के तबादले से घूसखोरी को रोका जा सकता है या इसके लिए कड़ी कार्रवाई की जरूरत है? पुलिस कांस्टेबल सुनील टोके की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि महकमे के वरिष्ठ अधिकारी इस पहलू पर विचार करें और शिकायत के लिए बनाए गए ई-मेल आईडी का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करें। ताकि लोगों को इसके बारे में पता चले। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को लेकर ट्रैफिक पुलिस को कड़ी फटकार लगाई थी और हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट के इस निर्देश के तहत बुधवार को मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) अमितेश कुमार ने अदालत में हलफनामा दायर किया। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने हलफनामे में कहा है कि ट्रैफिक पुलिस में जारी अवैध गतिविधियों(घूसखोरी) को रोकने व कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
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इसके साथ ही हमने एक ई-मेल आईडी बनाया है, जिसमें आम लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। मुख्य ट्रैफिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। चरणबध्द तरीके से ई – चलान को लागू किया जा रहा है। खंडपीठ ने फिलहाल मामले की सुनवाई आठ सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी है। इस दौरान खंडपीठ ने ट्रैफिक पुलिस विभाग की ओर से उठाए गए कदमों की सराहना भी की और कहा कि विभाग सही दिशा में काम कर रहा है।
तय है घूसखोरी का रेट कार्ड
टोके ने याचिका में दावा किया है कि ट्रैफिक पुलिस ने घूसखोरी का एक रेट कार्ड तय कर रखा है। इसके हिसाब से लोगों से राशि वसूली जाती है। यह राशि दुकान के बाहर पार्किंग के नाम पर, निर्माण कार्य से जुड़े माल को ले जानेवाले ट्रकों तथा आटो व टैक्सीचालकों से ली जाती है।
13 पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील प्राजक्ता शिंदे ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद 13 पुलिसवालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। उनका तबादला कर दिया गया है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि क्या महज तबादले से घूसखोरी को रोका जा सकता है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस पहलू पर विचार करें और हलफनामा दायर करें।





