हर बात पर टोकने वाले रिश्तेदारों से हैं परेशान? गुस्सा होने के बजाय आजमाएं ये स्मार्ट तरीके

इंडियन सोसाइटी की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि रिश्तेदार पर्सनल लाइफ में दखल बहुत देते हैं। जहां एक तरफ लोग अपनी किसी पड़ोस की आंटी से परेशान हैं तो वहीं दूसरी तरफ रिश्तेदार समय-समय पर कुछ न कुछ ऐसा कह देते हैं या पूछ लेते हैं कि जवाब देते भी नहीं बनता और जवाब देना भी एक मजबूरी है। ऐसे में अगर आप भी इसी परेशानी को झेल रहे हैं तो इससे निपटने के कई तरीके हैं, जिनसे अपने रिश्तेदारों से निपटा जा सकता है।
सीमाओं को डर न बनने दें
टॉक्सिक रिश्तेदारों को झेलने के लिए सीमाएं तय करना आना चाहिए। उन्हें साफ और सीधे शब्दों में बताएं कि किस तरह और कहां तक व्यवहार आप झेल सकते हैं। अगर ऐसा आगे इकी रिश्तेदार लिमिट क्रॉस कर रहे हैं या आपकी सीमाओं का सम्मान नहीं कर रहे तो उन्हें वहीं पर टोक देना बेहतर है।
इरादे समझने की कोशिश करें
कई बार रिश्तेदार भले के लिए भी कुछ बातें कहते हैं, इसलिए हमेशा रिएक्ट करने से पहले उनके इरादे समझने की कोशिश करें। यह आपको आगे का एक्शन लेने में मदद करेगा।
दूरी बनाने की पूरी कोशिश करें
रवैया बर्दाश्त के बिल्कुल भी काबिल न हो तो सही यही है कि उनसे कान्टैक्ट के सारे रास्ते बंद कर दें। किसी शादी में जाना हो, कोई खास पूजा हो, बर्थडे पार्टी हो या फिर कोई फोन कॉल, इन सब से दूरी बनाना ही मानसिक शांति दे सकता है।
हर चीज दिल पर न लें
कुछ लोगों का कोर नेचर ही सामने वाले को ट्रिगर करना होता है, उनके इस नेचर को समझें और हर बात को दिल पर न लें। बड़े-बुजुर्ग कहकर गए हैं हैं, एक कान से सुनो और दूसरे कान से निकाल दो।
गुस्सा दिखाकर बुरे न बनें
सीमाएं तय करने के बाद भी अगर रिश्तेदारों का व्यवहार बदले नहीं तो ऐसी स्थिति में गुस्सा करने या चिड़चिड़ापन दिखाने से दाव आप पर ही उल्टा पड़ जाएगा। बुरे बनने से अच्छा है हमेशा अपनी बात सोच-समझकर शांति से कहें। उन्हें दोबारा आपके रवैये पर कमेन्ट करने का कोई भी मौका देने से बचें।
बातचीत का रुख बदलें
बातों ही बातों में अगर आपको ऐसा लगता है कि अगला टारगेट आप ही हैं तो उनके कुछ कहने से पहले ही स्मार्ट तरीके अपनाते हुए कोई दूसरा टॉपिक छेड़ दें।





