खुद से प्यार करने की शुरुआत हैं ये 6 आदतें, गलती मानना और माफी मांगना भी है शामिल

मॉडर्न होता यह जमाना रिश्तों में पीछे छूट रहा है, डिजिटल दौर में हमारी लोगों से तो दूरी बन ही रही है, पर कहीं न कहीं खुद से भी दूरी बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी दिक्कतें भी अब ज्यादा सामने आ रही हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि दूसरों से अपने रिश्ते सुधारने से पहले खुद के संग रिश्ता दुरुस्त किया जाए। आइए कुछ ऐसे आसान से तरीके जानते हैं जिन्हें फॉलो करके हम खुद के साथ अपना रिश्ता अच्छा कर सकते हैं और खुद से प्यार करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

अपने आप को लेकर जागरूक रहें
कई बार लोग सोशल होते-होते यह भूल जाते हैं कि उनकी पसंद-नापसंद क्या है, वो कौन सी चीजें हैं जो उन्हें गुस्सा दिलाती हैं या किन बातों से उन्हें खुशी मिलती है। ऐसे में जरूरी है कि खुद के ऊपर ज्यादा फोकस करें। इससे खुद से जुड़ने में मदद मिलती है।

अपनी सीमाएं तय करें
दूसरों को ना कहने के साथ ही अपने विचारों को लेकर भी सतर्क हो जाएं, अगर कोइ विचार या सोच मानसिक रूप से कमजोर बना रही है तो उसे तुरंत रोक दें। यही वो सीमा है जो हमारा खुद के साथ रिश्ता बेहतर करने में मददगार है। एक सीमा यह भी है कि खुद के साथ सच्चे और ईमानदार बने रहें।

खुद की गलतियों की जिम्मेदारी लें
कई बार मन में चल रही लड़ाई को लेकर हम नतीजे पर नहीं पहुंच पाते, उसकी सबसे बड़ी वजह होती है अपनी गलती ही न मानना। जबकि माफी मांगना और अपनी गलती मान लेना भी एक तरह की हिम्मत है पर अफसोस इसे कमज़ोरी में गिना जाता है।

सहज होने की कोशिश करें
सबसे पहले खुद से यह सवाल पूछें कि क्या आप अपने शरीर और मन के साथ सहज हैं? दूसरे शब्दों में कहें तो कहीं अकेले रहकर मन में डर या बाहर की दुनिया में फिर से भागने का मन तो नहीं करता? अगर ऐसा है तो यह साफ है कि हम खुद के साथ सहज नहीं।

खुद को लेबल न दें
यहां खुद को लेबल देने से मतलब है कि उन चीजों से जिसे लेकर मन में हमेशा असुरक्षा रहती है। वो बातें, अनुभव या चीजें जो कमियों को उजागर करती हैं। अक्सर लोग अपनी इन्हीं कमियों को अपनी पहचान बना लेते हैं और उससे ऊपर नहीं निकल पाते।

इमोशन को समझें
ऐसा जरूर कहा जाता है कि इमोशन को दबाने वाला व्यक्ति मजबूत होता है, पर अगर यह फार्मूला हमेशा ही लाइफ में अपनाया जाए तो मेंटल हेल्थ पर भारी पड़ सकता है। इमोशन को समझना और उसे किसी फ्लो की तरह बह जाने देना जरूरी है।

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