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सावन का पहला सोमवार: 19 साल बाद बना ऐसा योग, जानें पूजा विधि

इस बार का सावन महीना अपने साथ कई श्रेष्ठ संयोग लेकर आया है। पहला संयोग यह कि सावन इस बार शनिवार से शुरू हुआ है, जो अपने आप में खास होता है। दूसरे इस बार सावन में 5 सोमवार होंगे और तीसरे यह कि ऐसा 19 साल बाद संयोग बना है, जब सावन का महीना पूरे 30 दिनों का होगा। इन सबसे अलग कई शुभ मुहूर्त बन रहे है, जो सावन में शिव भक्तों को खुशियों से सराबोर कर रहे हैं…

सावन का पहला सोमवार

इस सावन का पहला सोमवार 30 जुलाई को है। इस दिन सौभाग्य योग बन रहा है। सौभाग्य योग बहुत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। विवाह का मुहूर्त निकालते समय इस योग का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में शादी करने से गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है। वहीं सावन के सोमवार में इस मुहूर्त में पति-पत्नी साथ में शिवलिंग की पूजा करें तो उन्हें भोले भंडारी सहित मां पार्वती की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।

कैसे करें पूजा?

पति-पत्नी या प्रेमी युगल अपने रिश्तों में बेहतर तालमेल के लिए सोमवार को शिवलिंग की पूजा करें। अविवाहित लोग मनचाहे जीवनसाथी की कामना के साथ शिवलिंग का पूजन कर शिव कृपा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा करते समय इन बातों का ध्यान रखें…

-शिवलिंग पर सबसे पहले गंगाजल चढ़ाएं। यदि गंगाजल उपलब्ध न हो तो ताजा जल तांबे के लोटे में भरकर शिवलिंग पर अर्पित करें।

– इसके बाद दूध, दही, शहद,चावल शिवलिंग पर अर्पित करें।

– फिर बेल के पत्ते, ताजे फलों और फूलों से शिवलिंग का श्रृंगार करें या शिवजी पर अर्पित करें।

– शिवलिंग पर चंदन, रोली और अक्षत से टीका लगाएं और प्रसाद चढ़ाएं। प्रसाद में मिश्री, मीठे बताशे या मीठा इलायचीदाना रख सकते हैं।

– शिवलिंग के सामने दीया-धूप करें और शिवजी की आरती कर प्रसाद सभी में बांट दें और खुद भी खाएं। दिन भर मन को साफ रखें, किसी के लिए गलत विचार मन में न लाएं और शिवजी से सुखमय जीवन के लिए प्रार्थना करें।

दो बार सावन की शुरुआत क्यों?

हमारे देश में कई संस्कृतियां एक साथ प्रेम-पूर्वक रहती हैं। देश के कई राज्यों में संक्रांति के साथ ही सावन की शुरुआत मानी जाती है। इस साल संक्रांति 16 जुलाई को थी। ऐसे में जिन लोगों के यहां संक्रांति से सावन की शुरुआत मानी जाती है, उनके लिए सावन का पहला सोमवार 23 जुलाई को था। संक्रांति से सावन की शुरुआत की मान्यता ज्यादातर पहाड़ी इलाकों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल इत्यादि में है। जबकि ज्यादातर मैदानी इलाकों में सावन की शुरुआत पूर्णिमा से मानी जाती है, जो 27 जुलाई को थी। ऐसे में मैदानी क्षेत्रों में सावन का पहला सोमवार 30 जुलाई को मनाया जाएगा। संक्रांति की गणना के हिसाब से इस साल सावन में 5 सोमवार हैं।

कुंवारों और गृहस्थों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

सावन का महीना हर चराचर जीव के लिए महत्वपूर्ण है। युवा, वयस्क और वृद्ध अपनी-अपनी जरूरतों और इच्छाओं की पूर्ति के लिए शिव-पार्वती को मनाते हैं। मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत कर कुंवारे युवक-युवतियां शिवजी से मनचाहे जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। वहीं, शादीशुदा लोग बेहतर गृहस्थी के लिए भोले को पूजते हैं तो वृद्ध बच्चों की तरक्की और अपने लिए मोक्ष की कामना के साथ सावन में शिव की भक्ति करते हैं। इसलिए सावन का महीना और विशेषकर सावन के सोमवार को हमारी देश में खास माना जाता है। क्योंकि धर्मशास्त्रों के अनुसार, सोमवार शिवजी के पूजन का दिन होता है।

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